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कारतूस की बात समझ में आती है पर सुतली...

मुरादाबाद/इंटरनेट डेस्क।
Story Update : Thursday, February 23, 2012    2:28 AM
Explain the twine on the cartridge

गश्त के लिए थाने से रायफल उठाते ही सिपाही ने चिल्लाकर कहा सुतली लाओ। कारतूस मांगने की बात को समझ में आती है पर सुतली....। कुछ ही देर में तस्वीर साफ हो गई। सिपाही को जो रायफल गश्त के लिए दी गई थी उसका घोड़ा रायफल से जुदा था। उसने घोड़े को फंसाया और सुतली लपेटकर उसे ट्रिगर से कसकर बांध लिया।

महकमे के असलहे दिखावटी बनकर रह गए
ये एक नजीर भर है। महकमे में ऐसे कई असलहे हैं जो बस दिखावटी बनकर रह गए हैं। यूं तो वैसे ही थ्री नाट थ्री के ऐन वक्त पर धोखा दे जाने के तमाम किस्से हैं। ऐसी तमाम दर्दनाक घटनाएं हैं जब पुलिस कर्मियों को इसलिए जान गंवानी पड़ी कि मुठभेड़ के वक्त उनका असलहा दगा दे गया। खैर वहां तो फिर भी गनीमत है कि ऐन वक्त पर असलहे ने साथ नहीं दिया। लेकिन यहां तो जानते बूझते पुलिस कर्मी ऐसे हथियार हथियारों से गश्त कर रहे हैं जिनके नहीं चलने की पूरी गारंटी है।

मुठभेड़ हुई तो क्या होगा इनका
जिले में ऐसी कई रायफल हैं जिनमें ट्रिगर, घोड़ा और बट गड़बड़ हैं। कई जगह तो पुलिस वालों को गश्त पर निकलने से पहले बकायदा रायफल को इकट्ठा करना पड़ता है। ऐसे में यदि इन पुलिस वालों का कहीं बदमाशों से मुकाबला हो जाए तो मुठभेड़ के नतीजों की कल्पना आप कर सकते हैं। अहम सवाल यह है कि इन खस्ता हाल असलहों की मरम्मत कराने के प्रति महकमा इतना उदासीन क्यों है?


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