| यशवंत व्यास |
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 | शाहरुख किस चिड़िया का नाम है?
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| इस बार बात कुछ सीधे-सीधे होनी चाहिए। क्योंकि चीजें गालियों से तनी हुई नसों की ओर मुड़ती चली जा रही है और मामला परदे से बाहर भी इश्क के मुकाबले तेजाब का हो गया है। जब शाहरुख खान को .... |
...और एक शानदार डाकू होना |
क्लीन चिट, कल्लू मियां और राजा राम |
निष्ठा के पुल पर मोक्ष की यात्रा |
सरकार में पार्टी, पार्टी में सरकार |
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| थॉमस एल फ्रीडमैन |
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 | बेरुत की गलियों में उम्मीदें
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| जैसे ही मैं बेरुत की गलियों में निकलता हूं, द साउंड ऑफ साइलेंस (1963 में जॉन एफ केनेडी की हत्या के बाद चर्चित हुआ गीत) के शब्द कानों में गूंजने लगते हैं। यहां गलियों की दीवारों और .... |
दिशा बदल सकते हैं ब्लूमबर्ग |
जब देश नाकाम हो जाते हैं |
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| पॉल क्रुगमैन |
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 | यूरो से बाहर निकलने का समय
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| बीते शनिवार को द टाइम्स ने यूरोप में बढ़ती एक खतरनाक प्रवृत्ति पर रिपोर्ट लिखी। यह रिपोर्ट आर्थिक संकट के नतीजतन यूरोप में बढ़ती आत्महत्याओं से संबंधित है। वहां बेरोजगारी और व्यापा .... |
महंगाई नहीं, बेरोजगारी थामिए |
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| निकोलस क्रिस्टोफ |
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 | अमेरिका की बेबस बेटियां
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| अगर आप सोचते हैं कि अवैध देह व्यापार के अड्डे सिर्फ नेपाल या थाईलैंड जैसे देशों में ही हैं, तो एक अमेरिकी लड़की की दास्तान आपकी राय बदल सकती है। सबसे पहले ब्रियान्ना यानी उस लड़की .... |
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| तवलीन सिंह |
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 | ये कहां आ गए हम...
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| कुछ और कहने से पहले कह दूं कि भाई रेखा के क्या कहने। राज्यसभा में जैसे देवलोक से कोई अप्सरा शपथ लेने पहुंची हो। सुनहरी साड़ी, उनका चमकता गंदुमी रंग, घने काले बाल और अदाएं वही उमराव .... |
सरकार ही नहीं चाहती विदेशी निवेश |
क्यों होती है न्याय में इतनी देरी |
बोफोर्स का भूत फिर आया |
राजनीति के भूगोल में भूल गए इतिहास |
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| शेखर कपूर |
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 | क्रेडिट रेटिंग की हकीकत
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| यह मेरे लिए सचमुच बेहद आश्चर्यजनक है कि स्टैंडर्ड ऐंड पूअर्स नाम का एक निजी वित्तीय संगठन वैश्विक अर्थव्यवस्था को उलट-पुलट सकता है, और सरकारों (यूरो जोन पढ़ें) पर ऐसा कदम उठाने के .... |
अंतहीन दुनिया में |
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| विनीत नारायण |
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 | गर्व करने लायक संसदीय परंपरा
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| आज जनांदोलनों की अगुआई करने वाले ऐसे बहुत से लोग हैं, जो सांसदों को हर किस्म के अपराधों में लिप्त बताकर यह संदेश देने की कोशिश करते हैं कि हमारी संसदीय प्रणाली नाकाम रही है। साठ बर .... |
राष्ट्रीय सुरक्षा पर सियासत |
साझा सरकार की सीमाएं |
अश्लीलता के विरुद्ध |
साख का सवाल |
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| मधु पूर्णिमा किश्वर |
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 | घाटी में खतरनाक खेल
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| उमर अब्दुल्ला सभी मुख्यमंत्रियों में सबसे भाग्यशाली हैं। अब्दुल्ला और नेहरू-इंदिरा परिवार की तीन-चार पीढ़ियों की स्थायी दोस्ती के कारण उनकी न केवल 10, जनपथ तक सीधी पहुंच है, बल्कि .... |
बांटो और राज करो |
सबको साथ लेकर |
कम होती बच्चियां |
खाकी का खौफ |
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| मार्क टुली |
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 | उत्तर प्रदेश में अखिलेश
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| राहुल गांधी का कहना है कि उत्तर प्रदेश के चुनाव में पार्टी की विफलता से उन्हें सबक मिला है, और इस बारे में वह व्यापक चिंतन करेंगे।
उत्तर प्रदेश के नतीजे पर व्यापक चिंतन की जरूरत .... |
दिल्ली की दास्तान |
उम्मीद के दो दशक |
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| मारूफ रजा |
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 | विवाद से बचकर
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| आजादी के बाद से ही भारतीय सेना और सरकार के बीच बेहतर संबंध रहे हैं। भारतीय सेना ब्रिटिश परंपरा का अनुपालन करते हुए सरकार के आगे झुककर खुश है। नागरिक-सैन्य संबंधों के कई पर्यवेक्षको .... |
मुक्तियुद्ध की यादें |
जरा संभलकर |
खुद अपने जाल में |
चीन को चुनौती |
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| श्यौराज सिंह बेचैन |
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 | हाशिये की जिंदगी
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| अन्ना हजारे लगातार चर्चा में हैं। अब उनकी चिंता का विषय गांधी का गुजरात है। इसमें कोई शक नहीं कि उन्होंने भ्रष्टाचार-विरोध को एक नया आयाम दिया है। जंतर-मंतर पर उनके सफल आंदोलन के ब .... |
सत्ता में दलित |
दलितों का दर्द |
कितना बदला दलित |
जाति का जतन |
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| सुनील खिलनानी |
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 | प्रतिरोध की राजनीति
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| अन्ना हजारे के आंदोलन के साथ ही हाल के दिनों में उभरे खनन विवाद, जमीन विवाद, परमाणु संयंत्र के खिलाफ माहौल या खाप पंचायत या गुर्जरों का क्षोभ जैसे दूसरे आंदोलन केवल सत्ता में स्थित .... |
लोकतंत्र की सीमाएं |
उबल रहा है यूरोप |
तानाशाही का मिथक, लोकतंत्र की बयार |
उत्तर-दक्षिण का भेद |
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| सीताराम येचुरी |
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 | निवेश के बहाने मुनाफे का गणित
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| हाल ही में मीडिया में आई खबरें बताती हैं कि प्रधानमंत्री और उनके कार्यालय की ओर से एक विशेष आर्थिक संस्था (स्पेशल पर्पस व्हीकल, यानी एसपीवी) के गठन का प्रस्ताव किया गया है। मकसद है .... |
आर्थिक दिशा बदलनी होगी |
खतरे की घंटी |
विज्ञान में पिछड़े |
लोकपाल के अधीन |
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| सुनील |
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 | गांधी से न सही, ओलांद से सीखें
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| फ्रांस के नवनिर्वाचित समाजवादी राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने पद संभालने के बाद जो पहला फैसला किया, उससे एक स्पष्ट संदेश मिलता है। यह फैसला राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मंत्रियों के .... |
भूमंडलीकरण का शब्दजाल |
थोड़ा-सा नाटक, थोड़ा-सा झूठ |
एक सच, तीन झूठ |
विकास का विद्रूप |
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| कुमार प्रशांत |
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 | अभी हारी नहीं गई है लड़ाई
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| हम सत्यमेव जयते कहते तो बहुत पहले से आ रहे हैं, लेकिन देश में इसकी गूंज कभी इस तरह गूंजी हो, याद नहीं आता। यह भरोसा भी छीजता ही गया है कि सत्य की जीत होती है। लेकिन आमिर खान का पहल .... |
चलिए खोजते हैं अपना राष्ट्रपति! |
इस राजनीति की उम्र कितनी है |
लोकतंत्र की मर्यादा में |
एनसीटीसी तो सिर्फ बहाना है |
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| हामिद मीर |
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 | ढीली पड़ती पकड़
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| ईशनिंदा कानून के विरोध में सलमान तासीर के बाद अब अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री शहबाज भट्टी की जान गई है। लेकिन तथ्य यह है कि पाकिस्तान में आतंकवादी घटनाओं और आत्मघाती हमलों में कमी आ .... |
रिश्ते में खटास |
कट्टरवाद के विरुद्ध |
अयोध्या मुद्दे को हवा न दें |
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| गौतम कौल |
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 | सिनेमा के सौ साल का झूठ
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| करीब सप्ताह भर पहले पैंसठवें कांस फिल्म समारोह की शुरुआत हो चुकी है और हर बार की तरह इस बार भी भारतीय फिल्मोद्योग का एक शीर्ष प्रतिनिधमंडल वहां पहुंच चुका है। आने वाले दिनों में मल .... |
रेखा गणेशन मेरी सांसद |
फिल्मों पर प्रतिबंध से आगे |
भारतीय सिनेमा के सौमित्र |
गुरुदत्त की सिफारिश काम आई |
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| मृणाल पाण्डे |
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 | मदर्स डे और अकथ कहानियां
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| जब कभी मदर्स डे के रंगारंग विज्ञापन दिखने लगते हैं, भारतीय मांओं पर सोचते हुए मन में तुलसीदास की पंक्तियां गूंजती हैं, ‘सुनहु तात यह अकथ कहानी, समुझत बनत न जाय बखानी'। मां पर अनगिन .... |
इंडिया और भारत के उपभोक्ता |
जमीनी धरातल और चुनावी वायदे |
कीड़ी - कुंजर और हम लोग |
महामोर्चे की मरीचिका |
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| मेनका गांधी |
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 | खुश रहना हो, तो खरगोश पालें
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| हफ्ते भर पहले मुझे एक महिला ने ईमेल भेजकर बताया कि उसने दो खरगोश खरीद लाए थे, मगर देखते ही देखते वे 25 हो गए। इसके बाद उसने इन सबको एक सार्वजनिक पार्क में छोड़ दिया।
दो महीने बा .... |
उनसे दोस्ती कीजिए |
पशुओं से ठीक से पेश आएं |
हिंसा के विरुद्ध |
जंगल पर जंगलराज |
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| पुष्पेश पंत |
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 | अब उन्हें सहन नहीं होता
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| भारतीय संसद ने अपनी 60वीं सालगिरह मनाने के ठीक अगले दिन जो तेवर दिखलाए, वे भारतीय जनतंत्र के लिए चिंताजनक हैं। हाल के दिनों में इस सिद्धांत का प्रतिपादन सांसदों द्वारा किया जाता रह .... |
जनतांत्रिक परंपरा के नवरत्न |
अपनी गिरफ्त में अफगानिस्तान |
आलाकमान का अवसान |
कब सुलझेगा सीरिया संकट |
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| तरुण विजय |
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 | दक्षिण एशिया में सिकुड़ते हिंदू
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| एक समय था, जब संपूर्ण पूर्वी एशिया पर 700 वर्षों से अधिक लंबे कालखंड तक हिंदू सम्राटों ने एकछत्र राज्य किया था। आज उन्हीं हिंदुओं के उत्तराधिकारी दक्षिण एशिया में अमानुषिक दमन, अत् .... |
बदल रहा है पाकिस्तान! |
गायब हो जाएंगे खुदरा व्यापारी |
दोस्ती की कसौटी पर |
जिसने वक्त बदला |
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| मुहम्मद अकरम |
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 | क्रिकेट से कूटनीति
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| मोहाली में आज विश्व कप का दूसरा सेमी फाइनल मैच भारत और पाकिस्तान के बीच खेला जाएगा, जिसमें पाक प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी मौजूद रहेंगे। इस संदर्भ में भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन .... |
हे ईश्वर उन्हें माफ करना! |
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| सी. उदय भास्कर |
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 | लीक से हटकर
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| संचार क्रांति किस तरह दुनिया को झकझोर सकती है, उसे विकिलीक्स द्वाराजारी संवेदनशील दस्तावेजों से समझा जा सकता है। दुनिया के तमाम मसले जिस तरह बंद कमरों में कूटनीतिक संवादों के साथ न .... |
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| सागरिका घोष |
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 | जमीन पर सितारे
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| अगले कुछ घंटों में हम जान जाएंगे कि पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु और असम में मतदाताओं ने किन्हें चुना है। 2011 का चुनाव परिणाम क्षेत्रीय क्षत्रपों से संबंधित है। पार्टियां, घोषणापत् .... |
कट्टरवाद का दौर |
अमीरों की दरिद्रता |
रिश्तों की नई डोर |
भेदभाव के विरुद्ध |
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| परंजय गुहाठाकुरता |
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 | मंदी की आहट
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| देश की अर्थव्यवस्था जिस तेजी से नीचे जा रही है, उसके कई निहितार्थ हैं। अभी डॉलर के मुकाबले रुपया रिकॉर्ड गिरावट तक पहुंच गया है। गिरते-गिरते रुपया पहली बार ५३ के स्तर तक पहुंचा है। .... |
जरूरी हैं छोटे राज्य |
तेल में किसकी आग |
महंगाई की आग |
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| संजीव श्रीवास्तव |
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 | थोड़ा संभलकर
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| प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने किसी भी विवाद से दूर रहने के लिहाज से ही अगले कैबिनेट सचिव के रूप में उत्तर प्रदेश कैडर के 1974 बैच के आईएएस अफसर अजीत कुमार सेठ की नियुक्ति में वरिष्ठत .... |
दरकता लाल दुर्ग |
तेंदुलकर और अन्ना |
कांग्रेस को सबक |
सियासत की वंशबेल |
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| वंदना शिवा |
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 | विज्ञान का लोकतांत्रिक चेहरा
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| हाल ही में साइंस पत्रिका को दिए एक इंटरव्यू में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बताया था कि देश में विज्ञान के विकास के लिए दो तकनीकों पर ध्यान देना जरूरी है- पहला कृषि में जीई (जेनेटि .... |
बीज में छिपी है खाद्य संप्रभुता |
अन्न स्वराज |
कैसे बचेगी धरती |
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| नीरजा चौधरी |
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 | प्रणब मुखर्जी के होने का मतलब
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| हाल के दिनों में प्रणब दा को असामान्य रूप से खुश देखा गया है। यशवंत सिन्हा ने खुले तौर पर उनके राष्ट्रपति भवन जाने का संकेत दिया है। राष्ट्रपति पद के लिए अग्रणी दावेदार के रूप में .... |
यूपीए के लिए भारी पड़ता दांव |
ईमानदारी की भारी कीमत |
मध्यावधि चुनाव की अटकल |
सहयोगी दलों को संभालना होगा मुश्किल |
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| रवीश कुमार |
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 | अयोध्या में सन्नाटे का शोर
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| अयोध्या गया था। चौबीस सितंबर के फैसले के मद्देनजर शहर के हर मोड़ पर मोरचा बांधा जा रहा है। हथियारबंद सिपाही तैनात कर दिए गए हैं। हर पांच मिनट पर पुलिस की जीप या पीएसी के ट्रक आते-ज .... |
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| चिंतामणि महापात्र |
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 | ईरान के खिलाफ मजबूर अमेरिका
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| तीन दशकों से ज्यादा समय से ईरान अमेरिकी नेतृत्व वाले पश्चिमी जगत को ललकार रहा है। वर्ष 1979 में हुई इसलामी क्रांति ने ईरान में अमेरिका समर्थक शाह शासन को उखाड़कर लोकतंत्र की स्थापन .... |
किसकी जीत! |
दिल्ली और काबुल |
मैदान से बाहर |
अब मुसीबत पाकिस्तान की |
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| सुरेंद्र मोहन |
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 | पाकिस्तान से बात
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| भारतीय जनता पार्टी उन सभी पर बहुत बिगड़ रही है, जो कश्मीर मामले में पाकिस्तान से बातचीत के हिमायती हैं। हाल ही में इसकी जरूरत जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने जताई थी। .... |
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| मानवेंद्र सिंह |
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 | रंगभेद का राष्ट्रमंडल
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| गांधी जी सौभाग्यशाली थे कि उन्हें 19वीं सदी में दक्षिण अफ्रीका में ‘केवल गोरों के लिए’ आरक्षित ट्रेन से फेंका गया था। यदि वह 21वीं सदी की दिल्ली में चल रहे या गाड़ी चला रहे होते, त .... |
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| आरिफ मुहम्मद खां |
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 | आखिरी आदमी की उम्मीद
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| दिसंबर, 2010 के पहले सप्ताह में एक सम्मेलन में भाग लेने के लिए मैं लंदन में था। वहां एक मित्र ने मुझे रात्रिभोज पर आमंत्रित किया। उनका निवास थोड़ा दूरी पर था, इसलिए मैंने भूमिगत रे .... |
सर सैयद और राष्ट्रीय समरसता |
धर्म के मर्म को समझिए |
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| अनिल चमड़िया |
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 | वर्णमाला से बाहर
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| बिवेयर ऑफ पिक पॉकेट। यह वाक्य लोगों को सावधानी बरतने की सलाह देता है। हिंदी में इस वाक्य का अनुवाद है-जेबकतरों से सावधान। दिल्ली के मेट्रो में जो लोग यह वाक्य बार-बार सुनते हैं, उन .... |
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| राम प्रताप गुप्ता |
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 | गरीबों की बीमारी पर उदासीन
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| तपेदिक यानी टीबी के मरीजों की संख्या के लिहाज से भारत का स्थान दुनिया में पांचवां है। एक अनुमान बताता है कि विश्व में तपेदिक से पीड़ित रोगियों में 30 प्रतिशत हिस्सा भारत का है। अपन .... |
महंगी दवाओं का कारोबार |
हादसों की सड़क |
बोझ बुढ़ापे का |
बोतल में बंद पानी |
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| मणिशंकर अय्यर |
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 | पूर्वोत्तर की बदलेगी तसवीर
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| दिल्ली के नए अंतरराष्ट्रीय टर्मिनल से यह हमारी पहली उड़ान थी। कॉमनवेल्थ खेलों के लिए बनाए गया यह टर्मिनल उसी की तरह बेहद खर्चीला, कल्पनातीत ढंग से नकली और कृत्रिम सजावट के कारण भड .... |
सरहद से ऊंचा भरोसा |
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| सुब्रत मुखर्जी |
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 | एक विद्रोह की याद
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| पैंसठ वर्ष पूर्व हुई थी अंगरेजों के खिलाफ नौसैनिकों की बगावत
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पूरे भारत में एक महान राष्ट्रवादी लहर चल रही थी। इंग्लैंड में नई लेबर सरकार से काफी अपेक्षा .... |
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| जोगिंदर सिंह |
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 | देश में वीआईपी कौन है
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| अजीब एक ऐसा शब्द है, जो केंद्र सरकार के रवैये के लिए बिलकुल सटीक बैठता है। विगत अप्रैल में एक फिल्म अभिनेता को न्यूयॉर्क हवाई अड्डे पर रोका गया। हमारी सरकार ने उस फिल्म अभिनेता को .... |
भारी पड़ती ढिलाई |
दंड का भय |
हथौड़ा बनना होगा |
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| कैलाश वाजपेयी |
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 | लला फिर आइयौ खेलन होरी
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| अगर आप पारंपरिकता का सहारा लेकर हर वर्ष बनाए गए पंचांग पर दृष्टि डालें, तो पाएंगे कि अपने देश में हर दिन अथवा तिथि किसी न किसी व्रत, पर्व यानी त्योहार के लिए निर्धारित है। पर्व किस .... |
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| विजय विद्रोही |
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 | कितना मुफ्त कितना अनिवार्य
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| सर्वोच्च न्यायालय ने अपने ऐतिहासिक फैसले में शिक्षा के अधिकार कानून की वैधानिकता बरकरार रखते हुए देश के हर गरीब बच्चे की उम्मीदें जगाई हैं। शिक्षा के अधिकार को पूरी तरह से कामयाब ब .... |
जरदारी की जियारत के बहाने |
आसान नहीं लोकपाल का रास्ता |
किस काम का ऐसा लोकपाल |
तहरीर चौक में फैज |
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