|  English News  |  Education  |  AUMobile  |  Result
au
    Thursday, May 24, 2012  |  Last Update - 12:33 PM IST
साहित्य
  आप यहाँ हैं: होम » विचार » साहित्य

चिट्ठी

ऋषिवंश
Story Update : Saturday, March 10, 2012    11:35 PM

कुछ कहीं लगती नहीं संभावनाएं
गांव चिट्ठी शहर को लिखने लगे।

राजपथ के यात्री लौटे नहीं
धरी शर्तें संधिपत्रों की रहीं
प्रदर्शन करने लगीं फिर विवशताएं
गांव चिट्ठी शहर को लिखने लगे।

खेत बूढ़े, डीह बंध्या, पेट खाली
चोर का हिस्सा लगाते चोर माली
क्या पता कब कौन रुख बदलें हवाएं
गांव चिट्ठी शहर को लिखने लगे।

पुराना नाटक नए किरदार में है
और भूखा आदमी बाजार में है
कुछ बनी हैं इस तरह की योजनाएं
गांव चिट्ठी शहर को लिखने लगे।

सत्ता के आखेट
दौलत के दीवाने लोग,
चले देश को खाने लोग।
अपना स्वारथ अपना पेट,
अपनी थैली अपना टेंट
कहीं निशाना कहीं निगाह,
जारी सत्ता के आखेट
डाकू जाने माने लोग।
कहते कुछ, करते कुछ और
हैं मक्कारों के सिरमौर
फेंका जाए टनों अनाज,
पाएं ना भूखे दो कौर
व्याकुल सत्ता पाने लोग।


5

print

खबर पर अपनी राय दें

आप की राय -
Naval, Tehri
Very nice,i want also send you to my own poems,inform me my own .email id
rama kanwar, shimla
आपके अख़बार में मैं अपनी लिखी कवितायेँ कहानियां आलेख देना चाहती हु. कृपया इसका सही माध्यम बताएं.
pramod, Dehradun
पिछले वर्ष उत्तराखंड सरकार द्वारा समूह ग की सीधी भर्ती निकाली गई थी, मगर इस पर जो विलंभ पर विलंभ किया जा रहा है वह सोचनीय है. ना तो इनके रिजल्ट ही समय पर आ रहे हैं और ना ही अगली परीक्षाओ की तिथि बताई जा रही है. ऐसे में विद्यार्थियों का समय ही नष्ट हो रहा है. इस पर सम्बंधित विभाग को कुछ कदम शीघ्र उठाने चाहिए.
pankaj, noida
wah wah kya baat hai
SHAHJAHAN KHAN, GHAZIABAD
वह बहुत खूब ...बेबाक कविता.
नाम    
ईमेल    
शहर    

   
कोड     
कविता की अन्य ख़बरें
प्रमुख ख़बरें
Copyright © 2012 Amar Ujala Publications Ltd.
All Rights Reserved.
Address: C-21, Sector-59, Noida-201301
Telephone No : +91-120-4694000
To Advertise (Print)   : Mediakit
To Advertise (Online) : +91-120-4694132