|  English News  |  Education  |  AUMobile  |  Result
au
    Thursday, May 24, 2012  |  Last Update - 12:26 PM IST
आलेख
  आप यहाँ हैं: होम » विचार » आलेख

मध्य पूर्व में वर्चस्व की लड़ाई

रहीस सिंह
Story Update : Wednesday, February 08, 2012    9:24 PM

सीरिया में हिंसा की बढ़ती प्रवृत्तियों के कारण होम्स जैसे शहर अब कत्लगाह की तरह दिखने लगे हैं। इसके बावजूद सरकार की दमनात्मक कार्रवाइयों पर अंकुश लगाने के मामले में दुनिया की बड़ी शक्तियां दो खेमों में बंटी दिख रही हैं। इससे समाधान के बजाय संघर्ष के नए दौर की शुरुआत की आशंका बढ़ गई है।

कुछ समय पहले जब रूस ने सीरिया के मामले में अपना रुख कड़ा किया था, तो लगा था कि राष्ट्रपति बशर अल असद की उलटी गिनती शुरू होने वाली है, लेकिन अब स्थितियां पहले से भिन्न दिखाई दे रही हैं। सवाल है कि राष्ट्रपति असद रूस के कड़े रुख के समय जब सैनिक कार्रवाई की स्थिति में पश्चिमी एशिया को जलाने की धमकी दे सकते हैं, तो अब रूस और चीन द्वारा खुला समर्थन मिलने पर वह कितने आक्रामक हो सकते हैं?

अरब और पश्चिमी देशों के समर्थन से बने उस प्रस्ताव पर, जिसमें सीरिया में प्रदर्शनकारियों पर हिंसक कार्रवाई की निंदा की गई थी, रूस और चीन ने वीटो कर दिया। अमेरिका सहित उसके अन्य सहयोगी यूरोपीय देश मान रहे हैं कि रूस और चीन ने वीटो करके असद प्रशासन को हत्या का लाइसेंस दे दिया है, पर रूस और चीन का मानना है कि उनके द्वारा उठाया गया कदम संयुक्त राष्ट्र की भावनाओं के रक्षार्थ है। रूस और चीन सीरिया में बलपूर्वक सत्ता परिवर्तन के प्रयास को संयुक्त राष्ट्र की नियमावली के खिलाफ मानता है।

इसके बाद न केवल वैश्विक राजनीति में नई हलचल शुरू हो गई है, बल्कि तुर्की, लीबियाई, रूसी और चीनी दूतावासों के समक्ष बशर अल असद विरोधी प्रदर्शन में भी तेजी आई है। रूस और चीन के रवैये से नाराज अमेरिका ने सीरिया में अपना दूतावास बंद कर दिया है। हालांकि अमेरिका सहित उसके पश्चिमी सहयोगियों की कारगुजारियों से दुनिया वाकिफ है, इसलिए यह नहीं माना जा सकता कि सीरिया के खिलाफ अमेरिकी मुहिम किसी पवित्र मिशन का हिस्सा है। फिर भी सीरिया में दमन के इस तरीके को संरक्षण देना किसी भी लिहाज से उचित नहीं है।

राष्ट्रपति असद शायद रूस और चीन से ताकत पाकर काफी अड़ियल रवैया अपनाए हुए हैं। वह बेखौफ होकर पश्चिमी शक्तियों से पूछ चुके हैं कि क्या आप एक और अफगानिस्तान देखना चाहते हैं? उनके सवाल भले ही जायज हों, लेकिन सीरियाइयों के खिलाफ की जा रही उनकी कार्रवाई को सही नहीं ठहराया जा सकता।

दरअसल उनकी इस शब्दावली में दुनिया की उन बड़ी ताकतों का काफी योगदान है, जो मध्य-पूर्व में अपने-अपने हितों को लेकर नए सिरे से रणनीति बनाने में जुटी हैं। इन शक्तियों को मध्य-पूर्व में नए समीकरण बनाने के लिए ऐसे देशों की जरूरत है, जो विरोधियों के खिलाफ विशाल मंच उपलब्ध करा सके। रूस और चीन के लिए सीरिया इस दृष्टिकोण पर खरा उतर रहा है। दूसरी तरफ राष्ट्रपति असद इन देशों से शक्ति प्राप्त कर आंदोलन का दमन कर अपनी सत्ता बचाना चाह रहे हैं।

दमिश्क, हमा, दार उल और हुला शहर पर भारी संख्या में बख्तरबंद गाड़ियों में बैठे सैनिक लोगों को बेरहमी से मार रहे हैं। मार्च के मध्य से अब तक दसियों हजार लोग बेघर हो चुके हैं और दिसंबर में संयुक्त राष्ट्र द्वारा दिए बयान के मुताबिक सरकार-विरोधी प्रदर्शनों को दबाने की मुहिम में 7,000 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र और तमाम लोकतांत्रिक देशों द्वारा निंदा का सरकार पर कोई असर नहीं हुआ है। रूस और चीन की नजर में राष्ट्रपति बशर सरकार सुधार की राह पर हो सकती है, लेकिन लोकतंत्र की आवाज उठाने वालों को मौत के घाट उतारना रूस और चीन की नजर में ही सही हो सकता है।

बहरहाल मध्य-पूर्व में बड़ी शक्तियों का यह खेल कोई शुभ संकेत नहीं है। चूंकि मध्य-पूर्व में भारत के कई प्रकार के हित निहित हैं और इसके साथ उन देशों के साथ भी भारतीय हित संलग्न हैं, जो सीरिया के मुद्दे पर एक दूसरे के खिलाफ नजर आ रहे हैं। ऐसे में भारत को इस बड़े खेल पर गंभीर निगाह रखने जरूरत होगी।


3

print

खबर पर अपनी राय दें

आप की राय -
dharmendra, delhi
यह अस्थिरता समाज के विकास हेतु नुक्सान दायक सिद्ध हो सकती है
Adity Vikram, Meerut
kisi international ghatana ko itane behtar vishleshan ke sath hame dene ke liye bahut-bahut aabhar....Thank's Sir
Amitabh, Delhi
Samyik, sargarbhit aalekh, ham UPSC,PSC ki taiyari karane wale students ke liye International matters par aalekh bahut upyogi hote hain. ham sabhi Rahees singh sir ke lekh vaise bhi jyada pasand karate hain kyonik unake lekhon me fact paryapt matra me hote hain.Param shriddhey sampadak ji ko dhanyawad
नाम    
ईमेल    
शहर    

   
कोड     
कूटनीति की अन्य ख़बरें की अन्य ख़बरें
प्रमुख ख़बरें
Copyright © 2012 Amar Ujala Publications Ltd.
All Rights Reserved.
Address: C-21, Sector-59, Noida-201301
Telephone No : +91-120-4694000
To Advertise (Print)   : Mediakit
To Advertise (Online) : +91-120-4694132