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चुनावी मौसम में मुबारकबाद

सुधीर विद्यार्थी
Story Update : Wednesday, February 01, 2012    10:23 PM

महंगी सब्जी-दाल मुबारक। घी-आटे का हाल मुबारक। नौकरशाह दलाल मुबारक। नेताओं का जाल मुबारक। काले धन की चमक मुबारक। गुंडागरदी धमक मुबारक। राजनीति में बाहुबली के, गाली थप्पड़ तुम्हें मुबारक। पूंजी का संजाल मुबारक। सरमाया की चाल मुबारक। सत्ता का जंजाल मुबारक। जनता का बदहाल मुबारक। टूटी सड़कें तुम्हें मुबारक। डीजल और पेट्रोल मुबारक।

पैदल होते मंत्रियों के, ढलते सूरज चांद मुबारक। बिछते मायाजाल मुबारक। नोटों के अंबार मुबारक। जांच और तिहाड़ मुबारक। लोकपाल का सांड़ मुबारक। अन्ना की हड़ताल मुबारक। नेताओं की खाल मुबारक। संसद के अड़ियल घोड़े की, ठक-ठक करती नाल मुबारक। इंकलाब के उन नारों का, फुसफुस होता खेल मुबारक। लोकतंत्र का जश्न मुबारक। दलबदलू का हुस्न मुबारक।

ब्लैक मनी को ह्वाइट करती, पूंजी की शतरंज मुबारक। दल में दलदल तुम्हें मुबारक। दल में भगदड़ तुम्हें मुबारक। राजनीति के इस दंगल में, इधर मुबारक उधर मुबारक। दागी- बागी तुम्हें मुबारक। ये बड़भागी तुम्हें मुबारक। पलटी बाजी तुम्हें मुबारक। जीती बाजी तुम्हें मुबारक। शपथ ग्रहण के ख्वाब दिखाते, पंडित-मुल्ला तुम्हें मुबारक। उलटे-पुलटे बयान मुबारक। पका दिए वे कान मुबारक। हंगामें और जोर मुबारक। रात सरीखा भोर मुबारक। खाए-पिए भरे पेटों का, गलाफाड़ वह शोर मुबारक।

इनके नारे तुम्हें मुबारक। उनके नारे तुम्हें मुबारक। नारों से जो टकरा जाएं, वे सब नारे तुम्हें मुबारक। लंपट चेहरे तुम्हें मुबारक। दमदम चेहरे तुम्हें मुबारक। चेहरों के ऊपर जो चेहरे, उन चेहरों के हाल मुबारक। ऊंची कीमत दाम मुबारक। सरेआम लुटती और बिकती, इज्जत का नीलाम मुबारक। ‘चेहरा चाल चरित्र’ मुबारक। पापी और पवित्र मुबारक। बाएं की हुंकार मुबारक।

दाएं की ललकार मुबारक। जो न बाएं और न दाएं, उनकी भी जयकार मुबारक। हाथ का पंजा तुम्हें मुबारक। कमल का धंधा तुम्हें मुबारक। साइकिल की इस लांग रेस में, हाथी-घोड़ा तुम्हें मुबारक। नील, पीले, हरे, गुलाबी, और लाल के गान मुबारक। जनप्रतिनिधि की शान मुबारक।

जिधर अंधेरा झोपड़ियों में, उन भूखों की जान मुबारक। पब्लिक की सूनी आंखों की, बची रोशनी तुम्हें मुबारक। जिनकी थाली खाली अब तक, रोटी का अरमान मुबारक। बोतल-मुरगा-जूस पी रहे, बेशर्मों की शर्म मुबारक। तुम्हें विजय का जश्न मुबारक। हमें हमारी हार मुबारक। जाने कब की प्यासी आंखें, लोकतंत्र गणतंत्र मुबारक।


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