विश्व प्रसिद्ध संस्था द एल्डर्स का एक शिष्टमंडल इन दिनों बिहार के दौरे पर आया है। इस शिष्टमंडल में नोबल पुरस्कार से सम्मानित द एल्डर्स के अध्यक्ष डेसमंड टुटु भी शामिल हैं।
द एल्डर्स दुनिया भर के नेताओं का एक समूह है, जो शांति एवं मानवाधिकारों के लिए वैश्विक स्तर पर काम करता है। इस समूह का गठन दक्षिण अफ्रीका के नेता नेलसन मंडेला ने 2007 में किया था। हालांकि मंडेला इस समूह के सक्रिय सदस्य नहीं हैं, लेकिन वह अब भी इसके मानद सदस्य हैं। म्यांमार की लोकतंत्र समर्थक नेता आन सांग सू की भी इस समूह की मानद सदस्य हैं। हमारे देश से इला भट्ट इन बड़ों (एल्डर्स) में शामिल हैं।
पूरे विश्व से शामिल ये बड़े नेता शांति स्थापित करने, मानवाधिकार की रक्षा करने, अशांत क्षेत्र के समाज को संभालने, गरीबी मिटाने, महिलाओं का सशक्तिकरण करने और अहिंसक आंदोलनों के जरिये बदलाव लाने की कोशिश करते हैं।
दरअसल इस तरह के समूह के गठन का विचार सबसे पहले उद्यमी रिचर्ड ब्रैनसन एवं संगीतकार पीटर गैब्रियल की बातचीत के दौरान उभरा। उनका मानना था कि जिस तरह विभिन्न समाजों के लोग अपनी समस्याओं के निवारण के लिए अपने बड़ों से मार्गदर्शन लेते हैं, उसी तरह तेजी से उभरते विश्व ग्राम को अपने अनुभवों का लाभ देने के लिए बड़े नेताओं का एक समूह गठित करना चाहिए। उन्होंने अपनी भावना का इजहार नेलसन मंडेला के साथ किया। और फिर जुलाई, 2007 में ग्रासा मैशल और डेसमंड टुटु के सहयोग से जोहानेसबर्ग में इस समूह का गठन किया गया।
द एल्डर्स शांति, बाल विवाह, स्वास्थ्य, शिक्षा, मानवाधिकार आदि मुद्दों पर काम करता है। इसके तहत यह भारत, मध्य पूर्व, श्रीलंका, सूडान, जिंबाब्वे, कोरियाई प्रायद्वीप आदि देशों में अपना अभियान चला रहा है।
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