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लालबत्ती छलांगने का एडवेंचर

सहीराम
Story Update : Wednesday, February 08, 2012    12:04 AM

ओप्रा विन्फ्रे ने पिछले दिनों कहा था कि वह फिर कभी भारत नहीं आएंगी। लेकिन आगरा से जयपुर पहुंचते-पहुंचते उनका यह निश्चय डगमगा गया। यह रंगीले राजस्थान का असर हो सकता है। या यह भी हो सकता है कि वहां के साहित्यिक माहौल ने उनका इरादा बदल दिया हो। उन्होंने भारत न आने की बात शायद इसलिए कही हो कि वृंदावन में जब वह अपनी फिल्म की शूटिंग कर रही थी, तो वहां उनके सुरक्षाकर्मियों के साथ कुछ पंगा हो गया था। उन्हें इसका बुरा नहीं मानना चाहिए था, क्योंकि हमारे सल्लू मियां के साथ तो अकसर ही ऐसे पंगे होते रहे हैं।

ओप्रा कोई दबंग नहीं हैं। वह तो सेलिब्रिटी हैं। बल्कि सेलिब्रिटीज की सेलिब्रिटी हैं। इसीलिए तो मुंबई पहुंचते ही पूरा बॉलीवुड उनके स्वागत में उमड़ पड़ा। यह कुछ-कुछ वैसा ही था, जैसे माइकल जैक्सन के आने पर पूरा मुंबई उन्हें देखने, सुनने और मिलने को बेताब हो उठा था। बाल ठाकरे भी उनसे मिलने का लोभ संवरण नहीं कर पाए थे और उन्हें इस बात पर गर्व महसूस हुआ था कि माइकल जैक्सन ने उनका टॉयलेट इस्तेमाल किया। जिस होटल में वह ठहरे थे, उसके तकिये संभाल कर रख लिए गए थे।

ओप्रा इतनी बड़ी सेलिब्रिटी हैं कि खुद अमिताभ बच्चन उन्हें अपनी कार में बिठाकर अपने घर ले गए। वह इतने ही मंत्रमुग्ध थे, जितने माइकल जैक्सन को अपने घर में देखकर बाल ठाकरे हुए होंगे। पर ओप्रा ने कहा कि उन्हें यह समझ में नहीं आया कि अभिषेक अपने माता-पिता के साथ क्यों रह रहे हैं। उन्हें यह भी समझ में नहीं आया कि भारत में सड़कों पर लालबत्तियां वास्तव में हैं क्यों? अगर ये ट्रैफिक रोकने के लिए हैं, तो लाल बत्ती होने पर भी लोग आते-जाते क्यों रहते हैं? उन्हें पता नहीं कि हमारे यहां लाल बत्ती छलांगना उसी तरह का एडवेंचर है, जैसा अमेरिकियों के यहां किसी भी देश में घुस जाना होता है। अमेरिकियों का यह एडवेंचर भी शायद उन्हें कभी समझ में न आए।

पर जैसे जयपुर आते-आते ओप्रा का यह निश्चय बदल गया। धीरे-धीरे उनकी यह समझ भी बदल गई कि युवा भारतीय अपने बुजुर्ग परिवारजनों के साथ क्यों रहते हैं। भारत में आकर भी अगर उन्होंने संस्कारों व परंपरा की बातें न सीखीं, तो फिर क्या सीखा। हम चाहे अपने इन्हीं संस्कारों और परंपराओं की रोज धज्जियां उड़ाते हों, पर विदेशियों से यह अपेक्षा जरूर रखते हैं कि वे इन्हीं पर लट्टू होते रहें। वरना तो दूसरी ओर वृंदावन की विधवाएं भी हैं, जिन पर ओप्रा फिल्म बना रही थी।


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