हेड कोच माइकल नॉब्स की तरह युवराज बाल्मिकी को भी लंदन के लिए क्वालीफाई होने की उम्मीद है। ऐसे में उनकी निगाहें अपने सबसे बड़े सपने और पहले ओलंपिक पर लगी हैं। यह भी रोचक है कि पिछले महीने ही वर्ल्ड सीरीज हॉकी (डब्ल्यूएसएच) ने युवराज बाल्मिकी और उनके भाई देवेंदर के मुंबई मारिंन्स की ओर से खेलने की घोषणा की। लेकिन अपने कूल्हे की चोट से उबर कर युवराज ने ‘अमर उजाला’ से बातचीत में कहा कि ओलंपिक खेलना सबसे बड़ा सम्मान है।
उन्होंने खूब शोहरत और इनाम हासिल किए
वैसे युवराज के लिए एक साथ ओलंपिक का सपना पूरा करना और लाखों रुपये दे रही डब्ल्यूएसएच को छोड़ना यकीनन आसान नहीं होने वाला। 22 साल के इस फॉरवर्ड ने कहा कि हर खिलाड़ी ओलंपिक खेलने का सपना रखता है। पिछले दो सालों के दौरान उन्होंने खूब शोहरत और इनाम हासिल किए हैं। लेकिन ओलंपिक में खेलने से बड़ी कोई बात नहीं। यकीनी तौर पर उनका यह सपना पूरा होगा।
WHS में मुंबई मारिंन्स की ओर से खेलेंगे
उल्लेखनीय है कि पिछले साल दिसंबर में कप्तान भरत छेत्री, तुषार खांडेकर, बाल्मिकी, श्रीजेश, संदीप सिंह और सरदार सिंह ने हॉकी इंडिया को लिखित में दिया है कि वे सभी बागी लीग की बजाय राष्ट्रीय टीम में ओलंपिक क्वालीफायर के चयन केलिए उपलब्ध रहेंगे। लेकिन 23 जनवरी को डब्ल्यूएसएच की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया कि युवराज बाल्मिकी और उनके भाई डब्ल्यूएसएच में मुंबई मारिंन्स की ओर से खेलेंगे। हॉकी इंडिया और इंटरनेशनल हॉकी फेडरेशन इस लीग को गैर मान्यता प्राप्त टूर्नामेंट घोषित कर चुके हैं। इस लीग में खेलने वाले खिलाड़ियों पर बैन भी लग सकता है और वे ओलंपिक में खेलने के लिए मान्य भी नहीं होंगे। ऐसे में युवराज को क्वालिफायर के बाद अपनी प्राथमिकताएं साफ करनी ही पड़ेंगी।
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