हेड कोच माइकल नॉब्स लगातार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि एक मजबूत टीम का चुनाव दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ हॉकी सीरीज खत्म होने के बाद ही किया जाएगा। रविवार को पांच मैचों की सीरीज का अंतिम मुकाबला है और यह ओलंपिक क्वालीफायर से पहले भारत के लिए आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच भी होगा। भारतीय इस सीरीज में 3-1 से आगे है।
हालांकि दक्षिण अफ्रीका जैसी टीम के खिलाफ पिछले दो मैचों में इसका प्रदर्शन औसत रहा है। जबकि हर मैच केसाथ मेहमान टीम ने अपना प्रदर्शन सुधारा है। उसमें स्टार खिलाड़ियों से भरी भारतीय टीम को हैरान करने की क्षमता साफ देखी जा सकती है। ऐसे में आखिरी मुकाबला काफी रोचक होने की उम्मीद है।
पहले चार मैचों के परिणामों को देखें तो भारतीय टीम का प्रदर्शन कहीं भी एक जैसा नहीं रहा है। शायद यह कैंप में शामिल सभी खिलाड़ियों को आजमाने के कारण हुआ हो। लेकिन संदीप सिंह राजपाल सिंह, तुषार खांडेकर, वीएस विनय, शिवेंदर सिंह, रधुनाथ और सरवनजीत सिंह जैसे सीनियर खिलाड़ियों का अनुभव वर्ल्ड कप क्वालीफायर जैसे अहम टूर्नामेंट से पहले डगमगाया नजर आ रहा है। संदीप डिफेंस की रीढ़ हैं लेकिन दक्षिण अफ्रिका के मिगुल डी ग्रासा जैसे युवा खिलाड़ी ने उनकी टांगों केबीच से गेंद निकाल कर भी मूव बनाया। फॉरवर्ड लाइन में तुषार,शिवेंदर और एसवी सुनील बहुत जल्द बॉल पर अपना नियंत्रण गंवा रहे हैं।
नॉब्स ने टीम की इस कमजोरी को स्वीकार करते हुए कहा कि कुछ बेसिक दिक्कतें हैं। सीरीज के बाद इन्हें दूर करने पर जोर दिया जाएगा। लेकिन अगले एक महीने से भी कम समय में यह चमत्कार वह कैसे करेंगे, यह नॉब्स बताने में नाकाम रहे।
टीम ही नहीं बल्कि खिलाड़ियों का अपना व्यक्तिगत प्रदर्शन भी काफी असंतुलित है। मसलन, वीएस सुनील दूसरे मैच में बेहतरीन खेले लेकिन बाकी दो में बॉल को रोकने और उसे ठीक से पास करने में दिक्कत दिखाई दी। चोट से उबर कर लौटे स्टार फॉरवर्ड युवराज बाल्मिकी ने गोल जरुर किया लेकिन उनकी ट्रेपिंग फिलहाल बहुत घटिया है।
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