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फरेब है आईपीएल का नियमों की दुहाई देना

नई दिल्ली।
Story Update : Sunday, February 05, 2012    12:55 AM
Fraud call on the rules of the IPL

सहारा के साथ विवाद में आईपीएल यह दलील दे रहा है कि वह किसी एक फ्रेंचाइजी के लिए नियम नहीं बदलेगा। लेकिन सच तो यह है कि आईपीएल ने पिछले चार सत्र में अपनी सहूलियत के हिसाब से अपने ही नियमों को एक तरफ रख दिया। पिछले सीजन में चैंपियंस लीग के दौरान मुंबई इंडियंस को पांच विदेशी खिलाड़ियों के साथ खेलने की इजाजत देना सबसे ताजा उदाहरण है।

मुंबई इंडियंस को दी 5 विदेशी खिलाड़ियों की इजाजत
आईपीएल के नियमों के अनुसार कोई टीम चार विदेशी खिलाड़ियों से अधिक के साथ नहीं उतर सकती। पिछली बार मुंबई इंडियन के 23 करारशुदा खिलाड़ियों में सचिन तेंदुलकर, रोहित शर्मा, सूर्यकुमार यादव, अली मुर्तजा, मुनफ पटेल और आदित्य तारे चोटिल थे। मुंबई इंडियंस ने चार की जगह पांच विदेशी खिलाड़ियों से खेलने की इजाजत मांगी। आईपीएल की गवर्निंग काउंसिल की टेक्निकल कमेटी ने मुकेश अंबानी की टीम को रातोंरात इसकी इजाजत दे दी। हालांकि ‘चोटिल’ सूर्यकुमार यादव मुंबई में उसी दौरान अंडर-22 टीम का सिलेक्शन ट्रायल दे रहा था।

निरंजन शाह ने दी थी सफाई
उस समय टेक्निकल कमेटी में शामिल निरंजन शाह ने कहा था कि मुंबई इंडियंस के साथ काफी विकट स्थिति है। अगर भविष्य में ऐसी समस्या किसी दूसरी टीम के साथ आएगी तो उसे भी इसकी सुविधा मिलेगी। इस लिहाज से युवराज के करार की कीमत पर दूसरे खिलाड़ियों को लेने की सहारा की मांग को स्वीकार किया जा सकता था। ठीक इसी तरह पिछले सत्र से पहले यह घोषणा की गई थी कि सभी खिलाड़ियों को बोली की प्रक्रिया से गुजरना होगा। यानी कि कोई भी आइकान प्लेयर नहीं होगा।

ललित मोदी ने तोड़े नियम
एकाएक आईपीएल ने फैसला किया कि फ्रेंचाइजी चार खिलाड़ी को अपने साथ बरकरार रख सकती है। क्योंकि बोर्ड अध्यक्ष एन श्रीनिवासन की चेन्नई सुपरकिंग्स महेंद्र सिंह धोनी और मुंबई इंडियंस सचिन तेंदुलकर को छोड़ने को तैयार नहीं थे। इसके अलावा पहले सत्र में करार की पहली ही शर्त थी कि आईपीएल में खेलने वाले हर खिलाड़ी को अपने संबंधित बोर्ड से 60 दिन पहले नो आब्जेक्शन सर्टिफिकेट जमा करवाना होगा। पहला सत्र कामयाब हुआ तो उस समय के चेयरमैन ललित मोदी ने इस नियम की धज्जियां उड़ा दी। नतीजा यह हुआ कि कई खिलाड़ियों ने अपने बोर्ड के खिलाफ बगावत कर दी। क्रिस गेल इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं।

जसविंदर सिद्धू


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