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कमाई के लिहाज से ‘रन आउट’ हुआ बोर्ड

नई दिल्ली।
Story Update : Sunday, February 05, 2012    12:52 AM
BCCI out from the Sahara Group

सहारा के बतौर स्पोंसर हाथ खींच लेने के फैसले का बीसीसीआई के लिए पैसे के लिहाज से बड़ा संकट साबित हो सकता है। यह फैसला ऐसे समय में हुआ है जब भारतीय टीम बुरी तरह से पिट रही है। क्रिकेट की टीआरपी (टारगेट रेटिंग प्वाइंट) गिरी है और बोर्ड के पैसे के सबसे बड़े स्रौत टीवी प्रसारण अधिकार पर ग्रहण लग चुका है। ऐसे में बोर्ड के लिए संकट से उबर पाना आसान नहीं होगा। नया स्पोंसर जुटाना भी नहीं। सहारा हर टेस्ट मैच,वनडे व टी-20 के लिए बोर्ड को 3.34 करोड़ रुपये देता था।

निंबस के बिकने की भी खबर
बोर्ड के साथ करार के मुताबिक निंबस को हर अंतरराष्ट्रीय मैच के लिए 31.5 करोड़ रुपये का भुगतान करना था। बाजार की मंदी और डॉलर के सामने रुपये के गिरने के कारण कंपनियों ने गिरती टीआरपी के बीच विज्ञापनों से अपने हाथ खींचने शुरु किए तो इसका सीधा असर निंबस पर पड़ा। अब हालत यह है कि निबंस के साथ अपना करार खत्म करके बोर्ड 2000 करोड़ रुपये की गारंटी मनी के लिए कोर्ट में लड़ाई लड़ रहा है। यही नहीं निंबस के बिकने की खबर भी आ चुकी है।

टेस्ट में हार से टीआरपी गिरी
टीम विदेशी जमीं पर लगातार आठ टेस्ट मैच हार चुकी है। कई कंपनियों ने पहले से ही खिलाड़ियों के साथ करार को लेकर फिर से विचार विमर्श करना शुरु कर दिया है। इसके अलावा बाजार की मौजूदा परिस्थितियों के बीच कौन सी बड़ी कंपनी आगे आएगी,यह देखना रोचक होगा। उल्लेखनीय है कि आस्ट्रेलिया में खेले गए पहले दो टेस्ट मैच की भारत में टीआरपी 0.89 और 0.70 दर्ज की गई। 2007-08 की सीरीज में यह 1.07 और 1.30 थी। जाहिर है कि यह बोर्ड के लिए अच्छे संकेत नहीं है। सबसे खतरनाक बात यह है कि इन सभी दिक्कतों के बावजूद बोर्ड का पूरा फोकस आईपीएल पर लगा हुआ है। लेकिन पिछले सत्र में कंपनियों ने आईपीएल से दूरी बनाना शुरू कर दिया। इसके अलावा उसकी टीआरपी भी बुरी तरह गिरी है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि हर सत्र में अपनी फिल्म पर्दे पर उतारने से डरने वाले बॉलीवुड ने इस बार आईपीएल को चुनौती देने की घोषणा की है।

युवी को लेकर खिंची तलवारें
शीर्ष सूत्रों के मुताबिक, दोनों पक्षों में कड़वाहट सहारा की टीम पुणे वारियर्स के प्रमुख खिलाड़ी युवराज को लेकर आई। अस्वस्थ ‘युवी’ की आईपीएल-5 में खेलने को लेकर अनिश्चितता के चलते सहारा ने बीसीसीआई से कहा था कि बल्लेबाज की 1.8 मिलियन डॉलर की कीमत खिलाड़ियों की नीलामी के लिए उसकी कुल राशि में जोड़ी जाए लेकिन बोर्ड ने नियमों का हवाला देयह आग्रह ठुकरा दिया। युवराज के प्रति सहानुभूति नहीं जताने के लिए भी बीसीसीआई से सहारा खफा है।

पुणे वारियर्स की भागीदारी पर संदेह
सहारा के फैसले से आईपीएल में पुणे वारियर्स की भागीदारी पर भी संदेह गहरा गया है। इस टीम ने खिलाड़ियों की नीलामी में भाग नहीं लिया। आईपीएल के सीईओ सुंदर रमन ने कहा कि हमें यह सूचना नहीं मिली है कि पुणे वारियर्स आईपीएल-5 में खेलेगा या नहीं।

‘पुणे वारियर्स का हटना दुर्भाग्यपूर्ण, आईपीएल जारी रहेगी।’
-राजीव शुक्ला, आईपीएल कमिश्नर

‘हमने बोर्ड को बहुत समझाया पर हमारी एक नहीं सुनी। हालांकि हम किसी को दोष नहीं देना चाहते’
-सुब्रतो राय सहारा, चेयरमैन सहारा समूह

बोर्ड से झगड़े की जड़
- युवराज के बदले कोई दूसरा खिलाड़ी नहीं दिया, टीम में कोई बड़ा खिलाड़ी नहीं था।
- सौरव गांगुली को पुणे वारियर्स का कप्तान बनाए जाने की मांग की गई थी।
- आईपीएल-4 में 94 की जगह सिर्फ 74 मैच खेले गए, फ्रेंचाइजी को इसकी भरपाई नहीं हुई।
- पैसे देने के बावजूद वर्ल्ड कप के दौरान सहारा का लोगो का इस्तेमाल नहीं हुआ।
- 2008 में बोली नहीं खोली और सहारा को आईपीएल से बाहर रहना पड़ा।

अमर उजाला ब्यूरो


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