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नई पीढ़ी का गुस्साआजकल बच्चे अक्सर कहते हैं ‘मैं कुछ भी करुं, आपको मतलब’। ‘मां प्लीज आप मेरे मामलों में दखल मत दो’। अभिभावकों का लहजा होता है ‘आजकल तुम कोई बात नहीं सुनते, जब पापा पिटाई करेंगे तभी सुधरोगे’। ‘जो बात मना करो तुम वही करती हो, ज्यादा बिगड़ने की जरूरत नहीं
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सुंदर सपनों का घ्ारघर यानी चार दीवारों के अंदर एक परिवार और उसका वातावरण। खुशहाली के लिए इस माहौल को ऐसे सजाइए कि हर जरूरत पूरी हो आैर घर भी नया लगे
हर किसी का सपना होता है सुंदर घर। मगर इस सपने को पूरा करने के लिए आपको घर के इंटीरियर पर भी खास गौर करना पड़ेगा। तभ
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बच्चों को स्कूल भेजनाजरूरी मीटिंग हो, काम की डेडलाइन या घर संभालने से जुड़ा कोई दूसरा काम, बच्चों को स्कूल भेजने जितना मुश्किल कुछ भी नहीं है। हाल ही में सामने आए शोध के अनुसार 77 प्रतिशत अभिभावक सुबह और दोपहर बच्चों को स्कूल छोड़ने और लाने के काम को सबसे मुश्किल मानते ह
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नखरे न करे बच्चा...बच्चों की खाने-पीने की आदतों से अभिभावक अक्सर परेशान रहते हैं। लेकिन इसका भी कारण खुद वही हैं। दशकों की रिसर्च के बाद सामने आया है कि गर्भावस्था के दौरान मां द्वारा ज्यादा सेवन किए गए खाद्य पदार्थों का बच्चे के टेस्ट पर काफी फर्क पड़ता है। डिजोन (फ्र
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घर पर मिले प्यार तो ...लंदन। क्या ऑफिस के काम से थक चुके हैं? एक ताजा अध्ययन के अनुसार घर पर अगर जीवनसाथी का प्यार और सपोर्ट मिले तो दिन भर की थकान और तनाव चुटकियाें में छूमंतर हो सकता है। सुनने में यह बात बेहद आम सी लगती है। लेकिन फ्लोरिडा स्टेट यूनिवर्सिटी के अध्ययन के द
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नरिशिंग मसाजमसाज से त्वचा में न सिर्फ कसाव आता है, बल्कि त्वचा की नरिशिंग भी होती है। इसलिए फेशियल हो या क्लींजिंग, बिना मसाज दिए यह थैरेपी पूरी नहीं होती। मसाज के बारे में बता रही हैं, हमारी ब्यूटी एक्सपर्ट आपकी स्किन ड्राई हो या फिर ऑयली। हर प्रकार की त्वचा को
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खूब देखो टीवी !अब बच्चे घंटों टीवी देखें और वीडियो गेम खेलें, तो भी कोई फिक्र नहीं। ब्रिटेन के विशेषज्ञों द्वारा किए गए शोध में बच्चों के लिए ये गु़ड न्यूज सामने आई है। शोध के अनुसार बच्चों के लंबे समय तक टीवी और वीडियो गेम इस्तेमाल करने का बुरा असर तब तक नहीं पड़त
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क्योंकि हर काम का एक वक्त होता हैगौतम बुद्व ने कहा था अतीत में मत जियो, न भविष्य के सपने बुनो, खुद को वर्तमान में जीने योग्य बनाओ। उनके कहने का तात्पर्य समय की महत्ता जानने का था। हमारा वर्तमान तभी सही रहेगा जब हम वर्तमान का संपूर्ण और बेहतर उपयोग कर सकेंगे। उसके लिए हमें कई बार 24
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नींद न आने से याददाश्त को खतराअगर आप रात भर करवटें बदलते रहते हैं तो यह आपकी याददाश्त के लिए ठीक नहीं। एक अध्ययन के अनुसार नींद न आना बुढ़ापे में आपकी स्मरण शक्ति के लिए समस्या पैदा कर सकता है और अल्जाइमर का कारण बन सकती है।
वाशिंगटन यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ मेडिसिन में शोधकर्
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उम्र संग बढ़ता बोझबच्चे बडे़ हो गए हैं और कामकाज का बोझ भी पहले जैसा नहीं रहा। 50 की उम्र तक लोगों के पास पर्याप्त समय होता है, जिसमें वे जिंदगी का मजा ले सकते हैं। इसके बावजूद न जाने क्यों जिंदगी के खुशनुमा पल लौटकर नहीं आते। दरअसल 50 की उम्र तक जिंदगी और भी मुश्किल
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