श्रीलंका के तमिलों की समस्या के सियासी हल में आ रही बाधा और मतभेदों के बीच राष्ट्रपति महिंद्रा राजपक्षे ने शनिवार को कहा कि देश के जातीय संकट का हल दूसरे देशों द्वारा बताए गए समाधान से नहीं निकल सकता है। भारत द्वारा समर्थित और तमिल क्षेत्रों में प्रभाव रखने वाले संगठन टीएनए (तमिल नेशनल अलाइंस) के साथ रुकी वार्ता के संदर्भ में राष्ट्रपति ने कहा कि तमिल संगठन को राजनीतिक प्रक्रिया में भाग लेना चाहिए न कि इस संकट के समाधान के लिए विदेशी प्रभाव का इस्तेमाल करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्रीय सवाल के समाधान के लिए एक तंत्र विकसित किया गया है, जिसके तहत संसदीय समिति ऐसे मसलों को निपटाती है। राजपक्षे ने यह बातें श्रीलंका के स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कहीं। उन्होंने कहा कि सरकार को टीएनए का वह पत्र मिला है, जिसमें उसने अलग से राजस्व और उत्तरी पूर्व के क्षेत्रों में पुलिस अधिकार दिए जाने की मांग 13वें संशोधन द्वारा की है।
राजपक्षे ने कहा कि यह मांग भारत समर्थित है। उन्होंने कहा कि यह देश के सभी सियासी दलों का दायित्व है कि वे इस समस्या का हल जनता की आकांक्षाओं को ध्यान में रखकर करें न कि किसी बाहरी फार्मूले या विदेशी दबाव में। ज्ञात रहे कि टीएनए ने पिछले दिनों सरकार के उस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया था, जिसमें उससे तमिलों की समस्या के समाधान के लिए संसदीय कमेटी में शामिल होने का आग्रह किया गया था।
0
खबर पर अपनी राय दें