न्यायपालिका और सरकार के बीच जारी तनाव के बीच सोमवार को पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने तीन केंद्रीय मंत्रियों समेत 28 सांसदों और विधायकों के चुनाव को निलंबित कर दिया। कोर्ट के इस फैसले से सत्तारूढ़ पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी और उसके एक सहयोगी दल से संबंधित तीन केंद्रीय मंत्री भी प्रभावित हुए हैं।
4 सदस्यीय बेंच ने यह आदेश जारी किया
इनमें वित्त मंत्री अब्दुल हाफिज शेख और पेट्रोलियम मंत्री आसिम हुसैन (दोनों सीनेट या संसद के उच्च सदन के सदस्य) और नारकोटिक्स कंट्रोल मंत्री खुदा बक्श राजार (नेशनल असेंबली या संसद के निचले सदन के सदस्य) शामिल हैं। मुख्य न्यायाधीश इफ्तिखार चौधरी की अध्यक्षता वाली चार सदस्यीय बेंच ने यह आदेश जारी किया। बेंच पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ पार्टी के प्रमुख इमरान खान की याचिका की सुनवाई कर रही थी।
चुनाव फर्जी वोटरों को शामिल कर कराए गए
इमरान ने अपनी याचिका में उपचुनावों को अवैध घोषित किए जाने की अपील की थी। उन्होंने अपनी याचिका में कहा था कि ये चुनाव फर्जी वोटरों को शामिल कर कराए गए थे। याचिका की सुनवाई के दौरान यह पाया गया कि एक चुनाव आयोग के तहत संसद और प्रांतीय असेंबली के 28 सीटों का उपचुनाव कराया गया जोकि कुछ सदस्यों की गैर नियुक्ति के कारण पूरा नहीं था।
20वां संवैधानिक संशोधन पेश किया था
कोर्ट ने सरकार को इन उपचुनावों को कानूनी सही साबित करने के लिए 6 फरवरी तक का समय दिया था। सरकार ने उपचुनावों को वैध ठहराने के लिए संसद में 20वां संवैधानिक संशोधन पेश किया था लेकिन विपक्षी पार्टियों के साथ मतभेद के कारण यह पारित नहीं हो सका। हालांकि सरकार इस संशोधन को पास कराने के लिए विपक्षी पार्टियों खासकर पीएमएल-एन के साथ बातचीत कर रही है। अपने आदेश में शीर्ष कोर्ट ने कहा कि संसद और प्रांतीय असेंबली के 28 सदस्यों का चुनाव तब तक स्थगित रहेगा जब तक कि उनके चुनाव को वैध ठहराने वाले 20वें संविधान संशोधन पास नहीं हो जाता है।
21 फरवरी तक के लिए स्थगित
कोर्ट द्वारा जिन लॉ मेकरों के चुनाव को स्थगित किया गया है, उसमें नौ सदस्य नेशनल असेंबली, तीन सीनेटर, 11 सदस्य बलूचिस्तान, पंजाब, खैबर पख्तूनख्वा और सिंध प्रांत की असेंबली और पांच विभिन्न असेंबली के आरक्षित सदस्य हैं। इसके अलावा कोर्ट ने चुनाव आयोग को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि 25 फरवरी को होने वाले उपचुनाव को प्रमाणित वोटर लिस्ट के साथ कराया जाए। इसके बाद कोर्ट ने मामले को 21 फरवरी तक के लिए स्थगित कर दिया। सुप्रीम कोर्ट का गिलानी सरकार पर राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों को फिर से खोलने का दबाव है। सात सदस्यीय जजों की बेंच ने प्रधानमंत्री गिलानी को जरदारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले खोलने के कोर्ट के आदेश को न मानने पर कोर्ट की अवमानना के आरोप में 13 फरवरी को कोर्ट में पेश होने को कहा है।
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