पाकिस्तान में अभी गोपनीय मेमो मामले को उठा तूफान शांत भी नहीं पड़ा है, कि एक दूसरे विवाद के आसार नजर आने लगे हैं। यूसुफ रजा गिलानी की सरकार और सेना के बीच देश में सभी छावनी बोर्डों और सैन्य भूमि पर नियंत्रण के मामले को लेकर आमने सामने आ सकते हैं।
द न्यूज डेली की रिपोर्ट के मुताबिक, सैन्य भूमि और छावनी बोर्डों के नए डायरेक्टर जनरल की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर सेना और सरकार के बीच टकराव के हालात हो सकते हैं। वर्तमान में डायरेक्टर जनरल पर पदासीन मेजर जनरल अतहर हुसैन शाह का कार्यकाल 20 फरवरी को समाप्त हो रहा है और सेना अरबों रुपये के इस एंटरप्राइज पर अपना नियंत्रण बनाए रखना चाहती है।
नए डायरेक्टर जनरल को लेकर विवाद
रिपोर्ट में कहा गया है कि रक्षा मंत्रालय ने सेना में सेवारत मेजर जनरल ताहिर मसूद को इस पद नियुक्त करने के लिए प्रधानमंत्री को औपचारिक प्रस्ताव भेज दिया है लेकिन प्रधानमंत्री कार्यालय का इरादा इस अनुरोध को स्वीकार नहीं किए जाने का मालूम पड़ता है। प्रधानमंत्री के प्रवक्ता अकरम शाहीदी ने कहा कि प्रधानमंत्री सचिवालय को नए डायरेक्टर जनरल के पद नए मेजर जनरल की नियुक्ति के संदर्भ में कोई प्रस्ताव नहीं मिला है। शाहिदी ने कहा कि प्रधानमंत्री नियमों का उल्लंघन कर असैन्य पद पर किसी सैन्य अधिकारी की नियुक्ति को कभी मंजूरी नहीं देंगे।
पहले से है तनाव की स्थिति
रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रधानमंत्री सचिवालय ने नियमों का संदर्भ देते हुए स्पष्ट कर दिया है कि असैन्य पद पर किसी सेवारत सैन्य जनरल की नियुक्ति पर विचार करने का इच्छुक नहीं है। सरकार के इस रुख को देखते हुए सरकार और सेना के बीच तनाव के और बढ़ने की संभावना है। सेना और सरकार के बीच मेमो मामले को लेकर पहले से टकराव की स्थिति है। असैन्य अधिकारियों ने कहा कि यह पद पूरी तरह से असैन्य है।
डायरेक्टर जनरल 43 छावनी बोर्डों का प्रमुख
सैन्य भूमि और छावनियों का डायरेक्टर जनरल 43 छावनी बोर्डों और सैन्य संपत्ति कार्यालयों का प्रमुख होता है। सैन्य भूमि और छावनी समूहों के अस्तित्व में आने के बाद से इसका प्रमुख नागरिक नौकरशाह होता रहा है लेकिन पूर्व सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ ने 1999 में नियमों का उल्लंघन कर इस पद पर मेजर जनरल की नियुक्ति की थी। 2008 में सेना प्रमुख जनरल अशफाक परवेज कयानी ने असैन्य पदों से सभी सेवारत सैन्य अधिकारियों को वापस बुला लिया था लेकिन सैन्य भूमि और छावनी बोर्डों के डायरेक्टर जनरल के पद पर नियुक्त अधिकारी को वापस नहीं बुलाया था।
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