पाकिस्तानी सरकार को भ्रष्टाचार, कर चोरी और कुशासन के कारण पिछले चार वर्षों में 8.5 अरब रूपए का नुकसान उठाना पडा़ है। इससे पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था की चूलें हिल गई हैं। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल पाकिस्तान (टीआईपी) की ताजा रिपोर्ट में बताया गया है कि भ्रष्टाचार के कारण देश की अर्थव्यवस्था को हुआ नुकसान अनुमान से कहीं ज्यादा है और यह रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। टीआईपी के सलाहकार आदिल गिलानी ने कहा कि यदि पाकिस्तान में भ्रष्टाचार पर लगाम कस ली जाए तो इसे विदेश से एक धेला भी मदद लेने की जरूरत नहीं पडे़गी ।
गिलानी का कार्यकाल सबसे भ्रष्ट
रिपोर्ट में कहा गया कि प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी के चार वर्ष के कार्यकाल में सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार हुआ है। 2008 में 390 अरब रूपए, 2009 में 450 अरब रूपए, 2010 में 825 अरब रूपए तथा 2011 में 1000 अरब रूपए का नुकसान उठाना पडा़ है। इस प्रकार 2765 अरब रूपए के भ्रष्टाचार के ज्ञात मामले हैं। इनके अलावा वित्त मंत्री ने पुष्टि की है कि एफबीआर में प्रति वर्ष 500 अरब रूपए का भ्रष्टाचार हुआ है यानी यह कुल 200 अरब रूपए का हो गया। पाकिस्तान के महालेखाकार का कहना है कि वर्ष 2010 में 315 अरब रूपए का नुकसान हुआ है। लोकलेखा समिति ने 2011 तक 30 माह में 115 अरब रूपए के हानि की बात कही है।
सार्वजनिक उपक्रम डकार रहे 300 अरब रूपए
चक्रीय ऋण 19 करोड़ रूपए का हो गया है। केईएससी को वर्ष 2008 से ही प्रति वर्ष 55 अरब रूपए का गैर कानूनी फायदा दिया जा रहा है। पीएसओ, पीआईए, पाकिस्तान इस्पात और रेलवे जैसे सार्वजनिक उपक्रम प्रतिवर्ष डेढ़ सौ से 300 अरब रूपए हर वर्ष डकार जा रहे हैं। राष्ट्रीय जवाबदेही व्यूरो और संघीय जांच एजेंसी जैसे भ्रष्टाचार निरोधक इकाइयां इस बुराई की रोकथाम करने की बजाय भ्रष्टाचारियों का साथ दे रही हैं इसलिए भ्रष्टाचार पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।
चार वर्षों में 1200 अरब रूपए का नुकसान
गिलानी ने बताया कि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) पर कर का अनुपात 2008 में 11 प्रतिशत था जो 2011 में बढ़ने की बजाय कम होकर 9.1 प्रतिशत पर आ गया। पाकिस्तान का जीडीपी 175 अरब डॉलर का है और जीडीपी पर कर के अनुपात में 1.9 प्रतिशत की गिरावट का मतलब सालाना नुकसान 3.3 अरब डॉलर है। इसका मतलब पिछले चार वर्षों में 1200 अरब रूपए का नुकसान हुआ। टीआईपी के अलावा विश्व बैंक भी पाकिस्तान में भ्रष्टाचार बढ़ने की बात कह चुकी हैं।
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