पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने अपने खिलाफ अवमानना के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए अपील दायर की है। 200 पेज की इस अपील में शीर्ष अदालत से अपना आदेश वापस लेने का अनुरोध किया गया है। गौरतलब है कि शीर्ष अदालत ने आरोपपत्र दायर करने के लिए 13 फरवरी को पाक प्रधानमंत्री को स्वयं पेश होने का समन जारी किया है।
अपील पर सुनवाई जल्द करने की भी बात
गिलानी के वकील एतजाज एहसान ने बुधवार को बताया कि यह अपील भारत, आस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, फ्रांस और अमेरिका की शीर्ष अदालतों द्वारा पेश किए उदाहरणों पर आधारित था। भारत में शीर्ष अदालत के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर करने का प्रावधान है। एहसान ने कहा, ‘ मैंने आज एक अपील दायर की है। मैंने 50 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय केस भी बताए हैं और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ विशिष्ट कारण भी दिया है।’ उन्होंने अपील पर सुनवाई जल्द करने की भी बात कही है। अपील में 50 से भी अधिक उठाए गए संवैधानिक और कानूनी सवाल यह दिखाते हैं कि जरदारी के खिलाफ केस को दोबारा न खोले जाने का फैसला कर प्रधानमंत्री ने कुछ भी असंवैधानिक नहीं किया है। एहसान ने कहा कि वर्तमान में केस की सुनवाई कर रहे जजों के अलावा नौ जज हैं जो सुनवाई के लिए नई बेंच बना सकते हैं।
प्रावधान के तहत राष्ट्रपति को विशेष छूट
प्रधानमंत्री ने अपनी अपील में न्यायालय से आग्रह किया है कि विवादास्पद राष्ट्रीय सौहार्द्र अध्यादेश को लागू कर राष्ट्रपति जरदारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले को दोबारा शुरू न करने के लिए उनके खिलाफ दिया गया अवमानना का नोटिस का आदेश वापस ले। गौरतलब है कि दो फरवरी को मामले की सुनवाई के दौरान गिलानी के वकील सर्वोच्च अदालत को यह समझाने में नाकाम हुए थे कि संविधान के तहत राष्ट्रपति के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू नहीं की जा सकती है। इस प्रावधान के तहत राष्ट्रपति को विशेष छूट हासिल है।
पद से बर्खास्त भी किया जा सकता है
इसके बाद अदालत ने गिलानी के खिलाफ औपचारिक रूप से अवमानना का मामला दर्ज करने के लिए 13 फरवरी को अदालत में उन्हें स्वयं पेश होने का समन जारी किया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि गिलानी के खिलाफ अदालत के आदेश को लागू करने से इनकार करने के लिए अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के पर्याप्त आधार हैं। माना जा रहा है कि यदि गिलानी के खिलाफ आरोप साबित हो जाता है तो उन्हें छह माह की जेल की सजा और प्रधानमंत्री पद से बर्खास्त भी किया जा सकता है। सजा हुई तो राष्ट्रपति ही उन्हें माफी दे सकते हैं पर उनका दोष साबित होना रिकार्ड में मौजूद रहेगा और वह पांच वर्षों तक प्रधानमंत्री पद ग्रहण करने के लिए अयोग्य रहेंगे।
अपील पर सुनवाई आज
पाक प्रधानमंत्री के वकील की याचिका को संज्ञान में लेते हुए मुख्य न्यायाधीश इफ्तिखार चौधरी ने तय किया है कि उनके नेतृत्व में आठ जजों की बेंच बृहस्पतिवार सुबह 9.30 बजे इस अपील पर सुनवाई करेगी। गौरतलब है कि बुधवार को अपील दायर करते समय गिलानी के वकील ऐतजाज एहसान सुनवाई जल्द करने की मांग की थी। उन्होंने शुक्रवार के दिन का सुझाव भी दिया था पर कोर्ट ने व्यस्त कार्यक्रम के चलते इसे बृहस्पतिवार को ही रखा।
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