पाकिस्तान ने इस बात का खंडन किया है वह अमेरिका के सहयोग से कतर में होने वाली अफगान तालिबान शांति वार्ता में रुकावट खड़ी कर रहा है। उसने इस बात से इनकार किया कि तालिबान के कुछ वरिष्ठ कमांडरों को कतर जाने से रोका गया है। ज्ञात रहे कि इससे पहले खबर आई थी कि पाकिस्तान ने तालिबान के कुछ वरिष्ठ नेताओं को कतर जाने से रोका है। साथ ही उस पर यह भी आरोप लगे थे कि वह इस शांति प्रक्रिया में तब तक भाग नहीं लेगा, जब तक अफगानिस्तान इस वार्ता को संचालित करेगा।
अफगानिस्तान ने इस बात का दबाव बनाया
यहां लंदन में गार्जियन अखबार को दिए गए अपने साक्षात्कार में पाक विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार ने ये बातें कहीं। खार ने इस बात का भी खंडन किया कि अफगानिस्तान ने इस बात का दबाव बनाया था कि उसके अधिकारियों को तालिबानी कमांडरों तक पहुंचने दिया जाए। उन्होंने अपनी बात दोहराते हुए कहा कि पाकिस्तान को इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि तालिबानी नेता मुल्ला उमर कहां है। खार ने दावा करते हुए कहा कि मुल्ला उमर कहां है इसका पता न तो पाकिस्तान के आला अफसरों को है और न ही राजनेताओं को।
शांति वार्ता में पाकिस्तान का रुख क्या होगा
यह पूछे जाने पर कि तालिबान से खुली शांति वार्ता में पाकिस्तान का रुख क्या होगा, खार ने कहा कि अफगानिस्तान इस मसले पर उनके मुल्क को जो वस्तुस्थिति बताएगा, पाकिस्तान उसी के अनुसार काम करेगा। पाक विदेश मंत्री से जब यह पूछा गया कि क्या उनका देश अफगानी अधिकारियों को पाकिस्तान में बंद मुल्ला उमर के सहयोगी मुल्ला अब्दुल घानी से मिलने की इजाजत देगा, तो उन्होंने इस मसले पर बोलने से इनकार कर दिया। ज्ञात रहे कि खार का यह बयान अफगानी राष्ट्रपति हामिद करजई द्वारा अपनी पाक यात्रा के दौरान की गई उस मांग के एक सप्ताह बाद आया है, जिसमें करजई ने कहा था कि पाक तालिबान और अफगान बातचीत की मध्यस्थता करे।
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