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भारत को ऑस्ट्रेलिया से मिलेगा यूरेनियम |
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| मेलबर्न। |
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| Story Update : Sunday, December 04, 2011 10:14 PM |
आस्ट्रेलिया में सत्तारूढ़ लेबर पार्टी ने प्रधानमंत्री जूलिया गिलार्ड के भारत को यूरेनियम की बिक्री पर लंबे समय से लगे प्रतिबंध को हटाने के कदम का समर्थन किया है। यूरेनियम पर लगी रोक के हटने से भारत और आस्ट्रेलिया के द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा मिलेगा। सिडनी में आयोजित आस्ट्रेलियन लेबर पार्टी (एएलपी) की नेशनल कांफ्रेंस में मौजूद प्रतिनिधियों ने एनपीटी पर हस्ताक्षर नहीं करने के बावजूद भारत को यूरेनियम बेचने के गिलार्ड के फैसले का समर्थन किया। गिलार्ड के फैसले के पक्ष में 206 जबकि विरोध में 186 वोट पड़े। इस वर्ष मार्च में आई सुनामी और भूकंप के चलते जापान के क्षतिग्रस्त फुकुशिमा परमाण आपदा के चलते विरोधियों की आशंका का हवाला देते हुए गिलार्ड ने अपने फैसले के संदर्भ में कहा कि इस योजना की मंजूरी से आस्ट्रेलिया के भारत के साथ व्यापक और व्यापारिक संबंधों को बढ़ावा मिलेगा।
भारत को यूरेनियम बेचना चाहिए गिलार्ड ने कहा कि हम विश्व इतिहास की इस एशियन शताब्दी में नए अवसरों का फायदा उठाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि हम इस क्षेत्र में विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत जैसे अन्य देशों के साथ अपने रिश्तों को मजबूत बना सकें। आस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री ने कहा कि यह तर्क संगत नहीं है कि आस्ट्रेलिया चीन को यूरेनियम बेचे लेकिन भारत को नहीं। उन्होंने कहा कि हम वैसी राजनीतिक पार्टी नहीं हैं जोकि सख्त फैसलों से भागती हैं। गिलार्ड ने कहा कि इस कांफ्रेंस में हमें राष्ट्रीय हितों में फैसला लेना चाहिए। उन्होंने अपील की कि आस्ट्रेलिया को परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) के तहत अपने दायित्वों का उल्लंघन किए बगैर भारत को यूरेनियम बेचना चाहिए। गिलार्ड ने कहा कि भारत को यूरेनियम बेचने के किसी भी समझौते में अप्रसार के घटते को कम करने के लिए सख्त उपायों को शामिल किया जाएगा।
हस्ताक्षर किए बगैर यूरेनियम बेचना खतरनाक आस्ट्रेलिया की इस नीति में बदलाव का संसाधन मंत्री मार्टिन फर्गुसन, रक्षा मंत्री स्टीफन स्मिथ और दक्षिण आस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री जे वीथरिल ने समर्थन किया जबकि फेडरल इंफ्रास्ट्रक्चर मंत्री एंथोनी एल्बानेसी, सीनेटर डग कैमरन और स्टीफन कॉनराय, पीटर गेरेट जैसे कुछ पार्टी सदस्यों ने विरोध किया। गिलार्ड के कदम का विरोध करने वाले सदस्यों का कहना था कि भारत को एनपीटी पर हस्ताक्षर किए बगैर यूरेनियम बेचना खतरनाक है। आस्ट्रेलिया यूरेनियम की सप्लाई करने वाला दुनिया का तीसरा बड़ा देश है। इससे आस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्था में 750 मिलियन अमेरिकी डॉलर से ज्यादा का योगदान है और 4200 से ज्यादा रोजगार उत्पन्न करता है।
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