2जी स्पेक्ट्रम मामले में 122 विवादास्पद लाइसेंसों को रद्द करने संबंधी उच्चतम न्यायालय के फैसले ने विदेशी निवेश के एक स्थल के रूप में भारत की स्थिति को लेकर अविश्वास के एक नए दौर को जन्म दे दिया है। यह बात प्रतिष्ठित पत्रिका ‘टाइम’ ने कही है।
निवेशक विश्वास को लेकर चिंतित
तत्कालीन केंद्रीय संचार मंत्री ए. राजा द्वारा 2जी स्पेक्ट्रम लाइसेंस के विवादास्पद आवंटन से संबंधित मुद्दों का जिक्र करते हुए अमेरिकी पत्रिका ने कहा है कि यह फैसला उन लोगों के लिए बुरा मामला हो सकता है, जो भारत में कमजोर निवेशक विश्वास को लेकर चिंतित हैं।
नियमों का अनुसरण करना पर्याप्त नहीं
पत्रिका ने ‘इंडिया हैग्स अप ऑन द मोबाइल फोन इंडस्ट्री एंड इनवेस्टर कन्फिडेंस’ शीर्षक वाली एक लंबी रपट में कहा है, 'सर्व प्रथम, यह फैसला भारत के ताकतवर मंत्रालयों और नौकरशाहों के साथ डील कर रहीं कंपनियों को एक संकेत देता है कि भारतीय नियमों का अनुसरण करना पर्याप्त नहीं है।'
भारतीय नियम अति जटिल बने हुए
पत्रिका ने विश्व बैंक के ताजा व्यापारिक रैंकिंग में भारत के 132वें स्थान पर होने के कारणों का जिक्र करते हुए कहा है कि कई क्षेत्रों में आर्थिक उदारीकरण के बावजूद विदेशी स्वामित्व वाली कंपनियों, आयातों, निर्यातों और करों के संबंध में भारतीय नियम अति जटिल बने हुए हैं।
राजस्व बढ़ाने को लेकर अधिक चिंतित
‘टाइम’ ने कहा है कि सार्वजनिक तौर पर तो दूरसंचार कंपनियां सरकार की सभी मांगों को पूरा करती हैं, लेकिन पीठ पीछे वे कहती हैं कि 'वे भारतीय विनियामकों से बहुत तंग आ गई हैं, जो कि उपभोक्ताओं की हिफाजत करने या उद्योग के विकास के बदले राजस्व बढ़ाने को लेकर अधिक चिंतित लगते हैं।'
पत्रिका के अनुसार सिर्फ दूरसंचार उद्योग ही ऐसा नहीं है जो इस बात का संकेत करता है कि भारतीय बाजार ललचाते तो हैं, लेकिन वहां मुक्त बाजार की पर्याप्त सम्भावना नहीं है, बल्कि पत्रिका ने इस संदर्भ में विदेशी निवेशकों के लिए खुदरा क्षेत्र को खोलने को लेकर हुई राजनीतिक दांवपेंच का भी जिक्र किया है।
0
खबर पर अपनी राय दें