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योग गुरु बन अभी भी दे रहे स्वस्थ्य जीवन की शिक्षा

Hamirpur

Updated Wed, 05 Sep 2012 12:00 PM IST
भरुआसुमेरपुर (हमीरपुर) चंदपुरवा गांव के जूनियर स्कूल में 18 साल तक बच्चों को शिक्षा देने वाले टीचर बृजकिशोर यादव को 1989 में सर्वश्रेष्ठ टीचर के रूप में राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह मौका उनके जीवन का सबसे सुनहरा मौका था। आज भी रिटायर होने के बाद भी वे योग गुरु बनकर लोगों को स्वस्थ्य जीवन जीने का नुस्खा बता रहे हैं। अध्यापनकाल के दौरान उन्हें 1992 में तीन आईएएस और 1994 में चार पीसीएस अफसरों को प्रशिक्षित किया। प्रशिक्षु अधिकारियों ने अपनी निरीक्षण आख्या में लिखा है कि यह विद्यालय आदर्श है और सभी विद्यालय इस मापदंड के हो जाएं तो देश में प्राथमिक शिक्षा की हालत उच्च श्रेणी की हो सकती है।
विकासखंड क्षेत्र के बीहड़ी गांव सुरौलीबुजुर्ग निवासी बृजकिशोर यादव शिक्षा ग्रहण करने के बाद 15 मार्च 1965 में जूनियर विद्यालय में अध्यापक पद पर तैनात हुए। 1980 में चंदपुरवा गांव स्थित जूनियर विद्यालय में प्रधानाध्यापक बने। उन्होंने बताया कि इस विद्यालय में उन्होंने जीवन के 18 साल दिए। एक मुलाकात में उन्होंने बताया कि उनके पढ़ाए छात्र आज ऊंचे पदों पर आसीन हैं। इनमें डा. कैलाश बीएनवी इंटर कालेज राठ में प्रवक्ता पद पर है। रामप्रकाश विश्वकर्मा वरिष्ठ कोषाधिकारी, डा.सतीशचंद्र कुशवाहा एमबीबीएस व कंधीलाल कुशवाहा बीएएमएस डाक्टर है जबकि शिवप्रसाद कुशवाहा आईटीआई प्रवक्ता पद पर है। उन्होंने बताया कि 1992 में मंसूरी में आईएएस की ट्रेनिंग लेने वाले तीन अधिकारी व नैनीताल में 1994 में पीसीएस की ट्रेनिंग ले रहे चार अधिकारी ग्राम अध्ययन के लिए इस गांव आए और 10-10 दिनों तक रुककर यहां पढ़ाई की। उन्होंने उनसे सूरदास के दोहे व तुलसीदास की कविताओं की समीक्षा के रूप में प्रशिक्षण लिया। इन अधिकारियों में ज्योत्सना वर्मा कौल, राज वी अय्यर, एल्गोवन आईएएस व जेपी चौरासिया, योगेंद्र सिंह यादव, साहब सिंह व सूर्यमणिलाल चंद्र पीसीएस अधिकारी हैं। इन अधिकारियों ने रिपोर्ट में लिखा है कि अगर देश में इस स्तर के परिषदीय विद्यालय हो जाएं तो देश में प्राथमिक शिक्षा सर्वोत्तम श्रेणी को हो सकती है। वर्ष 2006 में सेवानिवृत्त होने के बाद भी वह शिक्षा देने में ही जुटे है। उन्होंने पुरानी यादाें को ताजा करते हुए बताया कि चंदपुरवा गांव के विकास के लिए भी उन्होंने विद्यालय में आने वाले अधिकारियों से अनुरोध कर चंदपुरवा भौनिया मार्ग पर पुलिया का निर्माण व इटरा गांव के पास कानपुर बांदा रेलवे लाइन पर मानव सहित रेलवे गेट स्थापित करवाया। टीचर ने बताया कि उनकी रचित कविताएं राष्ट्र प्रहरी शिक्षक व शिक्षक एकता पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी है।
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