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हो रही है अवैध रूप से डंप मौरंग की निकासी

Hamirpur

Updated Tue, 28 Aug 2012 12:00 PM IST
मौदहा (हमीरपुर)। क्षेत्र में मौरंग की खदाने बंद हैं। इसकी कमी पूरी करने के लिए अवैध रूप से लाई जा रही मौरंग से की जा रही है। कस्बे में भी कई स्थानों पर डंप कर इसका धंधा हो रहा है। पकड़े जाने पर ये व्यवसायी पहले के रखे एमएम 11 रायल्टी रसीद दिखाकर वाहन छुड़ा लेते हैं। इससे राजस्व का लाखों का चूना लग रहा है।
मौरंग का अवैध व्यापार ज्यादातर सीमावर्ती केन नदी से बीते जून और जुलाई महीनों में किया गया है। इधर नदी में बाढ़ की स्थित आ जाने से खनन कार्य बंद है। लेकिन पहले से किए गए अवैध खनन के स्टाक इन दिनों आधी रात के बाद किया जा रहा है। ट्रैक्टर ट्रालियों में लादकर इस मौरंग को लाया जा रहा है। कारोबारी इस मौरंग का सौदा पहले से ही भवन निर्माण कराने से तय कर लेते हैं। इतना ही नहीं कस्बे में लाइसेंस के नाम पर कुछ बालू के धंधेबाज इनसे सांठगांठ कर अपने डंप पर बालू डलवा रहे हैं। मंहगे दामों पर कस्बा सहित आसपास के क्षेत्रों में इसकी बिक्री कर रहे हैं। उच्चाधिकारियों का दबाव पड़ने पर ये लोग पहले से ही रखी एमएम 11 की रायल्टी पर्ची दिखाकर बच जाते हैं। वहीं बालू की खदानों के न खुलने से सरकारी कार्य बुरी तरह प्रभावित है।
इनसेट
एसडीएम ने थानेदारों को लिखा पत्र
मौदहा। उप जिलाधिकारी जेबी सिंह ने मौरंग के हो रहे अवैध कारोबार पर संबंधित थानाध्यक्षों को पत्र जारी किया। उन्होंने थानाध्यक्षों से अवैध रूप से आधी रात बाद हो रही मौरंग की निकासी पर रोक लगाने संबंधी प्रमाण पत्र भी मांगा है। एसडीएम ने बताया कि मौरंग की ढुलाई पर की गई शक्ति के बाद अब दिन में इसक ा धंधा बंद है। जबकि देर रात मौरंग की निकासी की जानकारी मिल रही है।
इनसेट
मौरंग की रोक से चमका गिट्टी डस्ट कारोबार
मौरग का कारोबार बंद होने से चोरी छिपे बेची जा रही मौरंग आम लोगों को मंहगी पड़ रही है। ऐसे में भवन निर्माण करा रहे ज्यादातर लोग कबरई स्थित क्रेशरों से निकलने वाली डस्ट पर आश्रित हैं। चोरी छिपे मिलने वाली मौरंग के दाम आसमान छू रहे हैं। साथ ही इसके पकड़े का खतरा भी रहता है। ऐसे में भवन निर्माता डस्ट लगाना ही बेहतर समझते हैं। संजरी ग्रेनाइट के नौशाद अहमद का कहना है कि मौरंग कारोबार बंद होने से अब लोगों का रुझान क्रे शरों से निकलने वाली डस्ट की ओर बढ़ा है। डस्ट की बिक्री पहले 100 रुपए में 100 फुट मिलती रही है। लेकिन मांग बढ़ने से सात सौ फुट बिकने लगी है। लेकिन मौरंग की मौजूदा दरों से आधे दामों पर 25 से 30 किमी के दायरे में बेची जा रही है। बताया कि अब क्रेशरों पर लखनऊ तक इसे भेजा जा रहा है।
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