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पांच साल बाद भी नहीं बने गरीबों के आशियाने

Hamirpur

Updated Mon, 23 Jul 2012 12:00 PM IST
हमीरपुर। कुरारा में आईएचडीपी योजना से गरीबों के बनाए जाने वाले आवासों का हाल खराब है। कार्यदाई संस्था सीएंडडीएस इकाई निर्माण कार्य को 113.57 लाख की दरकार है। पांच वर्ष पूर्व कार्यदाई संस्था ने 234.79 लाख खर्च कर आवासों को आधा अधूरा छोड़ दिया है।
सीएंडडीएस जलनिगम ने 24 अगस्त 2008 से आईएचडीपी योजना के आवासों के निर्माण का कार्य शुरू किया। इसके तहत इकाई को 11 ब्लाक बनाने है। प्रत्येक ब्लाक में 12 आवास बनेंगे। मौजूदा समय में 8 ब्लाक ों में भूतल, द्वितीय तल की चुनाई हो चुकी है। छत की स्लैब पर प्लास्टर तक हुआ है। जबकि भूतल में फर्श का कुछ कार्य कराया गया है। एक ब्लाक में द्वितीय तल की लिंटर तक चुनाई हुई है। जलाशय का निर्माण कार्य पूर्ण कराया गया है मगर टेस्टिंग नहीं हुई है। नलकूप की बोरिंग भी पूरी हो चुकी है। कई स्थानों पर आवास चटक गए हैं। साथ ही बाउंड्रीवाल भी चटक गई है। फिलहाल मौके पर कार्य की प्रगति 70 प्रतिशत है। कार्यदाई संस्था ने 234.59 लाख रुपए निर्माण कार्य में खर्च कर लिए है। फिलहाल पांच वर्ष बीतने के बाद भी संबंधित कार्यदाई संस्था को स्वीकृ त लागत का अभी 65 फीसदी धन ही मिला है। योजना का कार्य पूरा करने के लिए विभाग 113.57 लाख रुपए पाने को लगातार पत्राचार कर रहा है। लेकिन अभी तक बजट न मिलने से गरीबों के आवासों का आवंटन नहीं हो रहा है। इस मामले में जिलाधिकारी बी चंद्रकला ने सीएंडडीएस संस्था को आवासों में पाई गई कमियां दुरुस्त करने के निर्देश दिए है।
शीघ्र पूरा होगा निर्माण कार्य
जिला नगरीय अभिकरण के एपीओ रमाशंकर सोनी का कहना है कि इंट्रीग्रेट्रिड हाउसिंग स्लम डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत कुरारा में 132 आवास बन रहे है। बजट के अभाव में आवास पूरे नहीं हो सके। इधर 57.69 लाख की धनराशि सीएंडडीएस संस्था को मिले है। यह केंद्र सरकार की योजना है। इसमें 80 फीसदी बजट केंद्र देगा। जबकि 10 फीसदी राज्य सरकार व इतना ही संबंधित लाभार्थी से वसूला जाएगा। आवास देने को पहले तैयार हुई सूची को फिर खंगालना पड़ेगा। इस बीच प्रदेश सरकार की कांशीराम शहरी आवासीय योजना में कई लाभार्थी आवास पा चुके है।
पांच वर्ष से लगाए हैं आस
गरीबी की रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहे छुट्टन कबीर का घर इसी के बगल में है। कहा कि बीते पांच वर्ष से आस लगाए है। लेकिन आवासों का निर्माण पूरा नहीं हो रहा है। उनके पिता तो बंद पड़े आवासों की चौकीदारी कर रहे है।
काम शुरू तो करने को मिले मजदूरी
पड़ोसी रामदुलारी को मजदूरी नहीं मिल रही है। कहती है आवास का काम शुरू हो तो कुछ दिन काम मिल जाएगा। महिला ने कहा कि बरसात में काम न मिलने से आर्थिक तंगी चल रही है। कहती है शायद उसे भी इन पक्के आवासों में रहने कोमिल जाए।
अधिकारी कर रहे हीलाहवाली
सूरजा ने कहा कि सरकार गरीबों के लिए तमाम योजनाएं चला रही है। लेकिन अधिकारियों की मनमर्जी हावी है। आवासों की ओर इशारा करते हुए महिला ने कहा कि इसे ही देखो पांच वर्ष में भी पूरे नहीं हो सके है। महिला ने कहा कि आखिर कब उन्हें इन पक्के आवासों पर रहने को मिलेगा।
आवास पूरे होने पर करेगी आवेदन
बाबूजी क्या काम फिर शुरू होेने वाला है। कहा जल्दी शुरू कराएं तो उनका भी पेट चलने लगे। इस मौसम में वह लोग खाली हाथ बैठे है। निर्माणाधीन आवासों के बगल में रहने वाली संगीता ने कहा कि निर्माण पूरा हो तो वह भी आवास पाने के लिए आवेदन करेगी।
मानक के अनुरूप नहीं लगाया मसाला
रामसनेही ने कहा कि मानक के अनुरूप मैटेरियल न लगाए जाने से आवासों पर हुआ काम घटिया है। कहा कि 12 बोरी मौरंग में एक बोरी सीमेंट का मिश्रण की गई है। कहा कि यही कारण है कि कई स्थानों पर आवास चटक गए है। घटिया निर्माण होने पर आवास जल्दी ही धराशाई हो जाएंगे।
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