आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

जयपुर

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

राजस्थान +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

मौसम की मेहरबानी से अन्नदाता की झोली भरी

Hamirpur

Updated Fri, 11 May 2012 12:00 PM IST
हमीरपुर। मौसम की मेहरबानी और आधुनिक तकनीक के कारनामे से गेहूं की पैदावार हर बार से अधिक हुई है। जिले में पिछले साल के मुकाबले गेहूं की पैदावार उम्मीद से बेहतर यानी 31 कुंतल प्रति हेक्टेयर पैदा हुआ है। हालांकि जिले के कई क्षेत्र अभी भी पुराने ढर्रे पर हैं।
इधर कुछ सालों में जिले सिंचाई का क्षेत्रफल बढ़ा है। अच्छी बारिश ने किसानों की मेहनत में चार चांद लगा दिए। जिससे जिन क्षेत्रों में पानी की कमी रही वहां के किसानों को भी लाभ हुआ। कृषि विभाग के आंकड़े के मुताबिक फसलवार आच्छादन में 93,950 हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की बुआई होना बताया है जबकि जौ की खेती 2365 हेक्टेयर रही। चना भी 1 लाख 30 हजार, मटर 45425, मसूर 1076, राई/सरसों 8925 व अलसी का रकबा 4357 हेक्टेयर होना बताया है। कृषि विभाग ने 280992 हेक्टेयर पर रबी की फसल बोने का लक्ष्य तय किया लेकिन विभाग का दावा है कि लक्ष्य से अधिक 290671 हेक्टेयर में फसल बोई गई है। इधर प्रशासन ने जिले में हुई औसत पैदावार की जानकारी करने के लिए फसलों की क्राप कटिंग कराई है। क्राप कटिंग के आए आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो पिछले वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष पैदावार अधिक हुई। गेहूं की औसत पैदावार 31 कुंतल प्रति हेक्टेयर है, जो पिछले साल 26 कुंतल पैदावार थी। इसी तरह 9 कुंतल प्रति हेक्टेयर चना की पैदावार हुई है जबकि पिछले साल 8 कुंतल हुई थी। मटर भी पिछले साल के मुकाबले एक कुंतल ज्यादा पैदा हुआ है। इस बार 9 कुंतल प्रति हेेक्टेयर पैदावार होना बताया जा रहा है। मसूर की पैदावार चार कुंतल से बढ़कर 6 कुंतल प्रति हेक्टेयर रही है। इसी तरह लाही 8 कुंतल प्रति हेक्टेयर रही जो पिछले साल 6 कुंतल थी। इस मामले में उपकृषि निदेशक उमेश कटियार ने कहा कि कृषि विभाग फसल आच्छादन का संभावित एरिया तय करता है। उनका कहना है कि मौसम फसलों के अनुकूल रहा। यही वजह है कि पैदावार में इजाफा हुआ है।
कई इलाकों में नहीं बढ़ी पैदावार
हमीरपुर। जिले के कई इलाके ऐसे है जिनमें पैदावार बढ़ने का काम नहीं ले रही है। इचौली गांव को ही लें तो इस गांव के अलावा आसपास के रतवा, भरवारा, गुढ़ा जैसे में पैदावार कम हुई है। इचौली में हुई क्राप्ट कटिंग में प्रति हेक्टेयर गेहूं 20 कुंतल पैदा हुआ है। जबकि चना 6 कुंतल प्रति हेक्टेयर, मसूर मात्र चार कुंतल, लाही 9 कुंतल प्रति हेक्टेयर पैदा हुई है। जिले में इसी तरह के कई इलाके है जहां कृषि विभाग फसलों की पैदावार बढ़ाने में मददगार साबित नहीं हो पा रहा है। देखा जा रहा है कि इसी तरह सिसोलर, पतारा, बेरी, मसगांव, कुसमरा, नरायच, रीवन, कुंहेटा, खेड़ाशिलाजीत, मिश्रीपुर, मुंडेरा, करहिया सहित अन्य न्याय पंचायतें है जहां औसत से कम पैदावार हुई है।
  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

Browse By Tags

weather favor

स्पॉटलाइट

जानें क्या कहता है आपके आईलाइनर लगाने का अंदाज

  • बुधवार, 23 अगस्त 2017
  • +

रात में लाइट जलाकर सोते हैं तो हो जाएं सावधान

  • बुधवार, 23 अगस्त 2017
  • +

गीता बाली से शादी के बाद शम्मी कपूर की जिंदगी में हुआ था ये चमत्कार, रातोंरात बन गए थे सुपरस्टार

  • बुधवार, 23 अगस्त 2017
  • +

अगर आप हैं ऑयली स्किन से परेशान तो जरूर आपनाएं ये घरेलू उपाय

  • बुधवार, 23 अगस्त 2017
  • +

54 वर्ष की उम्र में भी झलक रही है श्रीदेवी की खूबसूरती, देखें तस्वीरें

  • बुधवार, 23 अगस्त 2017
  • +
Top
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!