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संगीत से उपचार

Story Update : Wednesday, February 01, 2012    10:02 PM
The healing power by Music notes

संगीत के स्वर केवल मन को ही झंकृत नहीं करते, बल्कि शरीर के अंग प्रत्यंगों पर भी अपनी तान की छाप छोड़ते हैं। डॉ जेनी के अनुसार भारतीय रागों से मसि्तष्क की सिकुड़ी हुई मांसपेशियों को संगीत की स्वर आवृत्तियां कानों की झिल्लियों को प्रकंपित करती हैं। स्नायु तंत्र की सेंसरी एवं मोटर नर्व्स सजग व सक्रिय होकर शारीरिक प्राण चेतना के प्रवाह को बढ़ा लेती है।

भारतीय रागों पर अनुसंधान अन्वेषण करने वाले चिकित्सा वैज्ञानिक कहते हैं कि राग भैरवी से शरीर में कफजन्य बीमारियां दूर होती हैं। राग आसावरी रक्त की अशुद्धियों का शमन करता है। राग मल्हार से क्रोध एवं मानसिक अस्थिरता दूर होती है। राग सौरत और राग जैजैवंती से भी मानसिक रोगों का से छुटकारा मिलता है। श्वास संबंधी बीमारी, तपेदिक, खांसी दमा आदि में भी राग भैरवी का प्रयोग किया जाता है।

संगीत चिकित्सा संवेदना के तारों से संचालित होती है। इसकी स्वर लहरियां तथा तरंग स्नायु तंत्र को आंदोलित उद्वेलित कर रोगोंम को नीरोग बनाने में सहायक होती है। इसी वजह से संगीत का सबसे सफल चिकित्सा उपचार मानसिक रोगों के निराकरण में किया जा रहा है। इससे मन स्थिर और शांत रहता है तथा भाव सरस व सुविकसित रहता है। केवल राग ही नहीं, साजों और शंख ध्वनि, घंटी की ध्वनि के भी इस क्षेत्र में चमत्कारिक परिणाम सामने आए हैं।


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