दुनिया के विकसित देशों के मुकाबले हमारे देश में सर्विस्ड अपार्टमेंट्स यानी अपार्टमेंट होटल्स एक नया कांसेप्ट है। रीयल एस्टेट सेक्टर में सर्विस्ड अपार्टमेंट के प्रति रुझान धीरे-धीरे जोर पकड़ रहा है। देश के लगभग सभी बड़े शहरों में सर्विस्ड अपार्टमेंट्स का निर्माण किया जा रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में ‘सर्विस्ड अपार्टमेंट्स’ तेजी से बढ़ने वाला कारोबार बन जाएगा। ऐसे में जरूरी है कि सर्विस्ड अपार्टमेंट्स से संबंधी कर प्रावधानों को भी जान लिया जाए।
यह काफी सुविधाजनक और लोकप्रिय
सामान्य तौर पर सर्विस्ड अपार्टमेंट्स को अपार्टमेंट होटल्स या स्टे होटल्स या कॉरपोरेट होटल्स कहते हैं। यह अपार्टमेंट्स सभी सुविधाओं से सुसज्जित छोटे अपार्टमेंट होते हैं, जिन्हें कम समय या दीर्घ अवधि के लिए किराये पर दिया जाता है। सामान्य होटलों की तुलना में सस्ता होने के कारण यह काफी सुविधाजनक और लोकप्रिय हैं। यदि कोई डेवलपर सर्विस्ड अपार्टमेंट्स का निर्माण करता और उन्हें किसी एक व्यक्ति या समूह को बेचता है कि, तो इस स्थिति में बिल्डर को सामान्य आयकर प्रावधान के तहत बिजनेस से हुई आय पर कर देना पड़ेगा। हालांकि यदि कोई छोटा बिजनेसमैन, जिसका सालाना टर्नओवर 60 लाख रुपये से कम है, सर्विस्ड अपाटमेंट्स बनवाकर उसे बेचता है, तो ऐसी स्थिति में वह आयकर कानून की धारा 44एडी की तहत करछूट के प्रावधानों का लाभ उठा सकता है।
खरीद लागत पर खर्च हुई राशि पर करछूट
इसके अतिरिक्त, सबसे महत्वपूर्ण सवाल सर्विस्ड अपार्टमेंट्स का संचालन करने वाले व्यक्ति पर कर देयता संबंधी सवालों को लेकर हैं। कोई एक व्यक्ति दो सर्विस्ड अपार्टमेंट्स खरीदकर अपना कारोबार शुरू कर सकता है। ऐसे में व्यक्ति की सर्विस्ड अपार्टमेंट से होने वाली आय को उसके बिजनेस से होने वाली आमदनी मानी जाएगी और इस पर उसे कर देना होगा। यदि सर्विस्ड अपार्टमेंट्स व्यक्ति के आय का वैकल्पिक स्रोत है, तो भी उस पर कर देयता बनती है। हालांकि सर्विस्ड अपार्टमेंट्स का संचालन करने वाला व्यक्ति कई तरह से कर छूट का लाभ भी हासिल कर सकता है। मसलन, वह अपार्टमेंट की खरीद लागत पर खर्च हुई राशि पर करछूट पा सकता है। इसके अतिरिक्त वह अपार्टमेंट के रखरखाव व देखरेख पर हुए व्यय पर भी करछूट का दावा कर सकता है।
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