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ज्वाइंट होमलोन में पाएं भरपूर करछूट

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Story Update : Sunday, March 06, 2011    11:52 PM
Get the full Karachut Joint Homlon

प्रॉपर्टी की आसमान छूती कीमतों ने नौकरी-पेशा और मध्यम आय वर्ग के लोगों के लिए होम लोन लिए बिना मकान खरीद पाना तकरीबन नामुमकिन बना दिया है। कई बार तो प्रॉपर्टी की कीमतें इतनी ज्यादा होती हैं कि अकेला व्यक्ति बैंक से न तो उतना लोन ले सकता है और न ही उसकी किस्तें भर पाने में सक्षम होता है। इसका बहुत कारगर समाधान है संयुक्त लोन। इसमें एक से अधिक व्यक्ति मिलकर लोन ले सकते हैं और उसकी किस्तें भर सकते हैं। ज्वाइंट होम लोन से जुड़ी एक बड़ी राहत की बात यह भी है कि एक ओर जहां इसमें लोन की अदायगी का भार बंट जाता है, वहीं आयकर अधिनियम की धारा 80 सी के तहत लोन की मूल राशि की अदायगी पर और धारा 24 के तहत लोन के ब्याज की अदायगी पर मिलने वाली आयकर छूट का लाभ प्रत्येक व्यक्ति को अलग-अलग मिलता है। इस तरह अगर पति पत्नी ज्वाइंट होम लोन लेकर मकान खरीदते हैं तो दोनों ही करछूट का लाभ उठा सकते हैं।

कौन ले सकता है
ज्वाइंट लोन के तहत एक से अधिक व्यक्ति होम लोन ले और उसका भुगतान कर सकते हैं। लोनधारक केवल पति-पत्नी ही नहीं, परिवार के अन्य सदस्य भी हो सकते हैं। पिता-पुत्र या पिता-पुत्री भी मिलकर होमलोन ले सकते हैं। इसी तरह मां-बेटा या मां-बेटी भी मिलकर लोन ले सकते हैं। ऐसे में लोन पर मिलने वाली कर राहतें भी लोन धारकों में विभाजित हो जाती हैं, जिन्हें संयुक्त लाभ (ज्वाइंट बेनिफिट) के रूप में जाना जाता है। हालांकि ज्वाइंट बेनिफिट का लाभ उठाने के लिए कुछ निर्धारित शर्तों को पूरा करना जरूरी होता है।

खूबियां और शर्तें
-लोन पर मिलने वाले ज्वाइंट बेनिफिट का लाभ लोन धारक संपत्ति में उनकी हिस्सेदारी के अनुपात में ही प्राप्त कर सकते हैं। यानी संपत्ति में जिसका जितना हिस्सा होगा, उसे उतना ही लाभ मिलेगा।
-लोन का हर सह-आवेदक लोन की मूल राशि पर अधिकतम एक लाख और ब्याज के भुगतान पर 1.5 लाख रुपये सालाना तक की ही करछूट का दावा कर सकता है।
-ज्वाइंट बेनिफिट पाने के लिए केवल मिलकर लोन लेना ही पर्याप्त नहीं है, संपत्ति की खरीद भी संयुक्त नामों से होनी चाहिए।
-संपत्ति में किस व्यक्ति की कितनी फीसदी हिस्सेदारी है, इस बात का स्पष्ट रूप से संपत्ति के कागजात में उल्लेख किया जाना चाहिए। यह इसलिए भी जरूरी है कि लोन की ईएमआई और संपत्ति से जुड़ी अन्य देनदारियों का निर्धारण भी हिस्सेदारी के अनुपात में ही किया जाता है।
-बैंक लोन का भुगतान ज्वाइंट अकाउंट के जरिए किया जाता है और इस खाते में सह-आवेदक अपना-अपना अंशदान डालते हैं। हालांकि हमेशा ऐसा संभव नहीं हो पाता। ऐसे में कोई आवेदक अपने हिस्से का भुगतान अलग से भी कर सकता है। इस तरह ज्वाइंट लोन की अदायगी में लचीलापन भी देखने को मिलता है।

डीटीसी पर रखें नजर
आने वाले समय में ज्वाइंट लोन के जरिये मकान खरीदने का इरादा रखने वालों को प्रत्यक्ष कर संहिता (डीटीसी) के प्रावधानों पर भी नजर रखनी होगी क्योंकि इसमें ज्वाइंट लोन पर मिलने वाली करछूट के नियम भिन्न हो सकते हैं।

सत्काम दिव्य, बिजनेस हेड, रुपी टॉक


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TEJENDRA SINGH, noida
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