वित्त वर्ष जैसे-जैसे समाप्ति की ओर बढ़ रहा है, लोगों की आयकर बचाने के उपायों की तलाश भी तेज हो गई है। बीमा, एफडी, एनएसई, केवीपी और पीपीएफ जैसे परंपरागत साधनों से टैक्स बचाने वाले कुछ अतिरिक्त बचत भी करना चाहते हैं। इन्फ्रास्ट्रक्चर बांड में निवेश इसका एक कारगर जरिया माना जाता है, क्योंकि यह बेहतर और सुनिश्चित रिटर्न देने के साथ-साथ 20 हजार रुपये की अतिरिक्त टैक्स छूट भी मुहैया कराता है। निवेश विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में इन्फ्रा बांड्स का विकल्प और भी लाभदायक बनने जा रहा है, क्योंकि इस बजट में इन बांड्स पर मिलने वाली छूट में भारी इजाफा किए जाने की प्रबल संभावनाएं दिख रही हैं। इन्फ्रा बांड पर धारा 80 सीसीएफ के तहत मिलने वाली आयकर छूट को इस बजट में 20 हजार रुपये से बढ़ाकर 50 हजार या एक लाख रुपये किए जाने की चर्चा बड़ी जोरशोर से चल रही है।
माकूल है यह समय
ऊंची महंगाई दर के चलते पिछले दो साल सख्त मौद्रिक नीति के साल रहे हैं। महंगाई को काबू करने के लिए आरबीआई की ओर से इस दौरान ब्याज दरों में 13 बार बढ़ोतरी हुई। ब्याज दरों में इजाफा होने से बांड की कीमतें घट रही हैं। दूसरी ओर महंगाई के काफी हद तक काबू में आ जाने के बाद जीडीपी की विकास दर बढ़ाने के लिए आरबीआई अब ब्याज दरों में कटौती शुरू करने की मुद्रा में दिखाई दे रहा है। मार्च तक मौद्रिक समीक्षा में रिजर्व बैंक ब्याज दरों में कमी की घोषणा कर सकता है। ऐसे में इन्फ्रा बांडों की खरीद और भी फायदेमंद विकल्प बन सकती है, क्योंकि जैसे ही ब्याज दरों में कटौती की जाएगी, इन बांडों की ब्याज दर बाजार में मौजूद विकल्पों से बेहतर हो जाएगी। ऐसे में मांग बढ़ने और पूंजी में वृद्धि के चलते बांड की कीमतों में इजाफा होने के प्रबल आसार हैं।
मौका न चूकें निवेशक
कर मुक्त बॉड्स में निवेश के अवसर बडे़ सीमित होते हैं, क्योंकि संसदीय अनुमोदन के बाद ही इन बांडों को जारी किया जा सकता है। इसलिए निवेशकों को निवेश के इस लाभ को उठाना चाहिए। पिछले साल सरकार ने बजट में कर मुक्त निर्गमों (इश्यू) के जरिये 40,000 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी होने के संकेत दिए थे। सरकार न्यूनतम 8 फीसदी की ब्याज की गारंटी वाले 30,000 करोड़ रुपये के बांड्स पहले ही जारी कर चुकी है। मजबूत वित्तीय आधार वाली सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों (पीएसयू) की ओर से जारी इन बांड्स में में एनएचएआई, पीएफसी, आईआरएफसी और हुडको के इन्फ्रा बांड शामिल हैं। सूचीकरण के दौरान इनमें निवेश करना एक बेहतर विकल्प हो सकता है।
लांग टर्म का रखें नजरिया
बांड्स में निवेश करने के लिए लंबी अवधि (लांग टर्म) का नजरिया लेकर चलना चाहिए। निवेशकों को कम से कम 6-12 महीनों के लिए निवेश में बने रहने के विषय में सोचना चाहिए। यह खासकर खुदरा निवेशकों के लिए सही है, जिन्होंने फिक्स्ड डिपॉजिट्स (सावधि जमा) में निवेश कर रखा है। एफडी से मिलने वाली आय पर पर कर देय होता है। इसके अलावा मौजूदा प्रावधानों में पांच साल से कम के एफडी पर टैक्स छूट भी नहीं मिलती। इस लिहाज से इन्फ्रा बांड निवेश के लिए आकर्षक निवेश विकल्प साबित होते हैं। यह आपको अधिकतर बैंकों द्वारा एफडी पर देय 9 फीसदी ब्याज की तुलना में 11.5 फीसदी 12 फीसदी तक का रिटर्न दे सकते हैं और मजे की बात यह है कि इनसे होने वाली आय भी आपके लिए करमुक्त होगी।
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