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रफ्ता-रफ्ता और घटा जीडीपी का अनुमान

नई दिल्ली/एजेंसी।
Story Update : Wednesday, February 08, 2012    1:23 AM
lower estimates of GDP

ग्लोबल अर्थव्यवस्था में नरमी का असर देश की आर्थिक विकास पर भी दिखने लगा है। विनिर्माण, कृषि और खनन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में तेज गिरावट के कारण चालू वित्त वर्ष में देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जोकि पिछले वित्त वर्ष में 8.4 फीसदी थी।

एक वक्तव्य में यह अनुमान जताया
केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (सीएसओ) ने मंगलवार को एक वक्तव्य में यह अनुमान जताया है। आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि ग्लोबल आर्थिक हालात के साथ-साथ घरेलू स्तर पर महंगाई, ऊंची ब्याज दरों व एफडीआई जैसे महत्वपूर्ण आर्थिक सुधारों सरकार द्वारा लागू न करा पाने के चलते भी आर्थिक विकास दर प्रभावित हुई है।

अनुमान रिजर्व बैंक के अनुमान से कम
सीएसओ का जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान रिजर्व बैंक के अनुमान से कम है। रिजर्व बैंक ने पिछले महीने मौद्रिक नीति की तिमाही समीक्षा में आर्थिक वृद्धि दर 7.0 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया था। मध्यावधि आर्थिक समीक्षा में सरकार ने वृद्धि दर के अनुमान को घटाकर 7.5 प्रतिशत के करीब कर दिया था। सीएसओ द्वारा जारी अनुमान के अनुसार कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र की वृद्धि दर 2011-12 में घटकर 2.5 फीसदी पर आ जाएगी, जबकि 2010-11 में यह 7.0 प्रतिशत थी।

इस क्षेत्र में 5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज
इसी तरह विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर भी घटकर 3.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो पिछले वित्त वर्ष में 7.6 प्रतिशत थी। खनन क्षेत्र के उत्पादन में पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 2.2 प्रतिशत की गिरावट की आशंका है, जबकि पिछले वित्त वर्ष में इस क्षेत्र में 5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी। निर्माण क्षेत्र में वृद्धि दर भी घटकर 4.8 प्रतिशत रहने का अनुमान है जबकि इससे पूर्व 2010-11 में यह 8 प्रतिशत थी।

दूसरी छमाही मे आर्थिक वृद्धि में धीमापन
अनुमान के मुताबिक वित्त, बीमा, रियल एस्टेट और व्यापारिक सेवाओं की वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष में 9.1 प्रतिशत रहेगी, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह 10.4 प्रतिशत थी। यह अनुमान जारी करते हुए कहा गया है कि 2011-12 की दूसरी छमाही मे आर्थिक वृद्धि में धीमापन आया है। अप्रैल-सितंबर, 2011 की छमाही के दौरान वृद्धि दर 7.3 प्रतिशत रही। तिमाही आधार पर देखा जाए तो वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में वृद्धि 7.7 प्रतिशत रही, जबकि दूसरी (जुलाई-सितंबर) में घट कर 6.9 प्रतिशत पर आ गई।

पानी, बिजली, परिवहन सहित कई क्षेत्रों में सुधार
सीएसओ के अनुमान के मुताबिक पानी, बिजली और गैस उत्पादन इस साल बेहतर रहने का अनुमान है। इस क्षेत्र की वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष में 8.3 प्रतिशत रहने क अनुमान है, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह 3 प्रतिशत थी। चालू वित्त वर्ष के दौरान व्यापार, होटल, परिवहन और संचार क्षेत्र की वृद्धि 11.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है जो 2010-11 में 11.1 प्रतिशत थी। सामुदायिक सामाजिक तथा निजी सेवा क्षेत्र की वृद्धि दर 2011-12 में 5.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है जो इससे पूर्व वित्त वर्ष में 4.5 प्रतिशत थी।

विकास दर के 8 फीसदी पर आने का भरोसा
चालू वित्त वर्ष में जीडीपी की वृद्धि दर में गिरावट चिंता का विषय है। वर्तमान आंकड़ों से साफ है कि 2011-12 में खपत और निवेश की मांग में कमी आई है। आने वाले दिनों में रिजर्व बैंक यदि ब्याज दरों में नरमी लाता है, तो हमें पूरा भरोसा है कि 8 फीसदी की विकास दर हासिल कर पाना संभव हो सकेगा। इसके साथ ही सरकार को निवेश बढ़ाने, लंबित परियोजनाओं के तुरंत क्रियान्वयन सहित आर्थिक वृद्धि दर को गति देने के लिए आगामी बजट में ठोस उपाय करने होंगे। ग्लोबल परिस्थितियों का भी असर हमारी अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।
- चंद्रजीत बनर्जी, डायरेक्टर जनरल, सीआईआई

फिक्की
अधिकारिक तौर पर यह साफ हो गया है कि चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी की विकास दर 7 फीसदी से नीचे 6.9 फीसदी रहेगी। सबसे अधिक निराशाजनक कृषि क्षेत्र के 2.5 फीसदी के विकास दर के अनुमान को लेकर है। पिछले वित्त वर्ष में यह 7 फीसदी रही थी। इसी तरह, उद्योग की वृद्धि दर 3.6 फीसदी और सर्विस सेक्टर की 8.8 फीसदी रहेगी। जबकि गत वित्त वर्ष में यह आंकड़े क्रमश: 6.8 फीसदी और 9.2 फीसदी थे। हमारा मानना है कि सरकार को निवेशकों का भरोसा बढ़ाने, ब्याज दरों में कमी लाने और राजकोषीय आधार को मजबूत करने के लिए तुरंत कारगर कदम उठाने होंगे।
- डॉ. राजीव कुमार, सेक्रेट्री जनरल, फिक्की

एसोचैम
चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी की वृद्धि दर का 6.9 फीसदी का संशोधित आंकड़ा निश्चित तौर पर निराश करने वाला और अनुमान से काफी कम है। उद्योगों द्वारा सभी स्तरों पर बेहतर प्रबंधन के साथ विभिन्न सेक्टरों की वृद्धि दर में तेजी लाने के लिए निवेश बढ़ाने की जरूरत है। चालू वित्त वर्ष के लिए कृषि और मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर की वृद्धि दर में गिरावट सबसे अधिक निराशाजनक है। सरकार को नए निवेश आकर्षित करने के लिए मौद्रिक नीति में नरमी लाने के उपाय करने चाहिए। ग्लोबल आर्थिक हालात का असर पर भी देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।
- दिलीप मोदी, प्रेसीडेंट, एसोचैम

हम पहले ही 7 प्रतिशत वृद्धि की बात कहते आ रहे हैं 6.9 फीसदी का अनुमान उसी के आसपास है। पहली छमाही में 7.3 तीसरी तिमाही में 6.9 फीसदी की विकास दर के आधार पर 7 प्रतिशत वृद्धि संभव है।
-मोंटेक सिंह आहलूवालिया, उपाध्यक्ष, योजना आयोग


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