आगामी वित्त वर्ष के लिए आम बजट बनाने में व्यस्त वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी को इन दिनों सपने में भी सब्सिडी का ‘भूत’ परेशान कर रहा है। सब्सिडी के बढ़ते बोझ पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि इन दिनों रातों की नींद उड़ने लगी है। चालू वित्त वर्ष के दौरान अकेले कृषि क्षेत्र में सब्सिडी का दायरा एक लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष 65,000 करोड़ रुपये था।
सरकार का सब्सिडी बोझ भी बढ़ेगा
लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली और भंडारण पर आयोजित कृषि एवं खाद्य मंत्रियों के सम्मेलन में वित्त मंत्री ने बताया कि चालू वित्त वर्ष के दौरान खाद्यान्न, उर्वरक और ईंधन की खुदरा बिक्री पर सब्सिडी बजट अनुमान के विपरीत 1.43 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की आशंका है। उन्होंने कहा कि बढ़ता सब्सिडी का बोझ और उसकी भरपाई की चिंता से रातों की नींद उड़ने लगी है। उन्होंने बताया कि खाद्य सुरक्षा कानून अमल में लाने के बाद जहां एक तरफ खाद्यान्न आपूर्ति बढ़ाने की जरूरत होगी, वहीं दूसरी ओर सरकार का सब्सिडी बोझ भी बढ़ेगा।
राजस्व प्राप्ति और खर्च के बीच अंतर बढ़ा
प्रणब मुखर्जी ने कहा कि आगामी बजट ऐसे समय आ रहा है, जब दुनिया में आर्थिक अनिश्चितता छाई हुई है। देश की आर्थिक वृद्धि की रफ्तार भी धीमी पड़ी है और राजस्व प्राप्ति और खर्च के बीच अंतर बढ़ा है। इस साल राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.6 फीसदी रहने का बजट अनुमान है। लेकिन माना जा रहा है कि यह एक फीसदी बढ़कर 5.6 फीसदी तक पहुंच जाएगा। पेट्रोलियम सब्सिडी के साथ उर्वरक और खाद्यान्न सब्सिडी भी पूर्व के अनुमान से काफी ज्यादा बढ़ चुकी है।
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