सोने की खरीद-फरोख्त में कालेधन के इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार आगामी बजट में गहनों की नगद खरीददारी पर विशेष कर लगा सकती है। इससे जहां सरकार की आमदनी बढ़ेगी वहीं उसे मोटी रकम चुकाकर सोने की खरीद करने वालों की जानकारी भी आसानी से हासिल हो सकेगी। वित्त मंत्रालय की ओर से मार्च 2012 में आने वाले बजट में इस प्रस्ताव को अमली जामा पहनाया जा सकता है।
कर को वापस पाया जा सकेगा
कर के रूप में चुकाई गई रकम का रिफंड क्लेम करने की सुविधा भी दी जाएगी। खास बात यह है कि बैंक चेक के जरिये सोना खरीदने वालों को कर का भुगतान नहीं करना होगा। यह अतिरिक्त कर महज उन खरीदारों पर लगेगा, जो नगदी के जरिये सीधे तौर पर बाजार से सोना खरीदेंगे। नगद खरीददारी करते समय चुकाए गए कर को वापस पाया जा सकेगा।
आयकर को खरीद की पर्ची भी देनी होगी
इसके लिए ग्राहकों को अपने आय व कर बचत के लिए किए गए निवेश की जानकारी के साथ आयकर विभाग को खरीद की पर्ची भी देनी होगी। विभाग इस आधार पर ग्राहक के खाते में चुकाए गए अतिरिक्त कर की रकम लौटाएगा। यह अतिरिक्त कर सोने के नगद लेन-देन पर दो फीसदी के करीब तक लगाया जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक सोने की बढ़ती खपत और ज्यादातर लेन-देन नगद में होने से परेशान वित्त मंत्रालय बजट में नए प्रावधान लाना चाहता है।
बड़ी मात्रा में कालेधन का इस्तेमाल किया
उल्लेखनीय है कि देश में प्रतिवर्ष करीब आठ सौ टन सोने का आयात किया जाता है, जिसकी ज्यादातर खरीद-फरोख्त नगद में होती है। इस खरीद में बड़ी मात्रा में कालेधन का इस्तेमाल किया जाता है। यही वजह है कि सरकार सोने के नगद कारोबार पर नजर रखकर कालेधन का इस्तेमाल करने वाले खरीदारों तक पहुंचने की राह तैयार करना चाहती है। महत्वपूर्ण यह है कि वित्त मंत्रालय यदि बजट में अतिरिक्त कर लगाने पर फैसला करता है, तो इससे न केवल नगद खरीदारी में पारदर्शिता आएगी, बल्कि सरकार के राजस्व में भी इजाफा होगा।
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