सोने के बदले कर्ज देने वाली वित्तीय कंपनी मण्णपुरम फाइनेंस लिमिटेड 10 फरवरी को रिजर्व बैंक के उस नोटिस पर चर्चा करेगी, जिसमें आरबीआई ने उसे ग्राहकों से जमा राशि स्वीकार न करने को कहा था। नोटिस जारी होने की खबर के बाद कंपनी के शेयरों में 20 फीसदी तक की बड़ी गिरावट देखी गई और यह 11.35 रुपये गिरकर 45.50 रुपये के भाव पर बंद हुए।
कंपनी ने एक बयान जारी कर बताया है कि 10 फरवरी को होने वाली बैठक में निदेशक मंडल इस मुद्दे पर व कॉरपोरेट शिकायतों के निवारण पर चर्चा करेगा। गौरतलब है कि रिजर्व बैंक ने नोटिस जारी करते हुए अपनी वेबसइट पर बताया है कि मण्णपुरम फाइनेंस या मण्णपुरम एग्रो द्वारा लोगों से जमा के रूप में राशि स्वीकार करना दंडनीय है और इसके लिए कारावास भी हो सकता है।
रिजर्व बैंक ने कहा है कि मण्णपुरम फाइनेंस लोगों से राशि जमा करा रहा है और मेग्रो कंपनी के नाम से रसीद भी दे रहा है। मेग्रो मण्णपुरम के कार्यकारी चेयरमैन वीपी नंदकुमार के पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी है। दूसरी ओर मण्णपुरम ने स्पष्ट किया है कि वह लोगों से जमा राशि स्वीकार नहीं कर रही, बल्कि सुरक्षित अपरिवर्तनीय डिबेंचर और सबॉर्डिनेट बांड के जरिये निवेश प्राप्त कर रही है, जोकि सार्वजनिक जमा (पब्लिक डिपॉजिट) के तहत नहीं आता। आरबीआई ने मार्च 2011 में कंपनी को जमा प्राप्त न करने वाली गैरबैंकिंग वित्तीय कंपनी के रूप में वर्गीकृत किया है। इससे पहले स्वीकार किए गए डिपॉजिटों का ब्याज सहित भुगतान किया जा चुका है।
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