लगातार दो बंपर फसलों की बदौलत देश महंगाई के चक्र से बाहर निकल आया है। पिछले कुछ महीनों से महंगाई के आंकड़ों में नरमी पर संतोष जताते हुए यह बात वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कही। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) पर चर्चा के लिए आयोजित सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए मुखर्जी ने देश में महंगाई बढ़ने की वजह बताते हुए कहा कि हाल के वर्षों में देश में आर्थिक विकास के चलते शहरी और ग्रामीण दोनों ही स्तरों पर लोगों की क्रय शक्ति में इजाफा हुए।
मजदूरी दरों में अच्छी बढ़ोतरी देखी गई
इससे चीजों की मांग बढ़ी, जोकि कीमतों में तेजी की वजह बनी। बारहवीं योजना की रिपोर्ट के अनुसार 2007-10 की अवधि में देशभर में मजदूरी दरों में अच्छी बढ़ोतरी देखी गई। सबसे ज्यादा वृद्धि आंध्र प्रदेश में 42 और उड़ीसा में 33 फीसदी की दर्ज की गई। यहां तक कि आर्थिक रूप से पिछड़े राज्यों में गिने जाने वाले बिहार और उत्तर प्रदेश में भी खेतिहर मजदूरी में क्रमश: 19 और 20 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।
सक्षमता सभी लोगों तक पहुंचनी जरूरी
वित्त मंत्री ने कहा कि ऐसे क्षेत्रों में भी लोगों की क्रय शक्ति में बढ़ोतरी होनी चाहिए, जो उत्पादकता के मामले में पीछे छूट गए हैं। 1.2 अरब की आबादी वाले देश में जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करने की सक्षमता सभी लोगों तक पहुंचनी जरूरी है। हरित क्रांति के जरिये हम खाद्यान्न के मामले में देश को आत्मनिर्भर बनाने में तो कामयाब हो गए हैं, पर अब एक दूसरी क्रांति की जरूरत है, जिसके जरिये हम हर एक व्यक्ति कोखाद्य सुरक्षा और उचित पोषण के दायरे में ला सकें।
मूलभूत ढांचे का विस्तार किया जाना जरूरी
इसके लिए कृषि में और निवेश की जरूरत है, जिसमें कि हाल के वर्ष में गिरावट देखने को मिली है। कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए कृषि आधारित क्षेत्रों में बिजली, पानी, सड़कों, गोदामों और शीतगृहों जैसे मूलभूत ढांचे का विस्तार किया जाना जरूरी है। कृषि के क्षेत्र में अनुसंधान और विस्तार की तकनीकों के विकास के लिए सार्वजनिक और निजी दोनों ही क्षेत्रों की ओर से सहयोग की जरूरत है।
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