सुप्रीम कोर्ट द्वारा जिन दूरसंचार कंपनियों के लाइसेंस रद्द किये गए हैं उन पर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का करीब 10 हजार करोड़ रुपये का ऋण है। वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ एक अधिकारी ने बताया कि इसमें से 7,500 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी है।
उन्होंने बताया कि मंत्रालय यह जानकारी जुटाने की कोशिश कर रहा है कि शेष 2,500 करोड रुपये दूरसंचार कंपनियों को कैसे दिए गए। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की परिसंपत्तियों की तुलना में हालांकि इन टेली कंपनियों को दिया गए गए कर्ज काफी छोटी है। इन कंपनियों को कर्ज देने वालों में भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, आईडीबीआई बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा, इलाहाबाद बैंक, केनरा बैंक और कॉरपोरेशन बैंक शामिल हैं। एसबीआई का कंपनियों पर 4,500 करोड़ रुपये का कर्ज है।
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