सुप्रीम कोर्ट ने कोटक महिंद्रा बैंक और उसके नौ शीर्ष कार्यकारियों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को रद्द करने से इनकार कर दिया। यह मामला एक शराब निर्माता के बकाया के भुगतान में धोखेबाजी के सिलसिले में दर्ज हुआ था। हालांकि शीर्ष अदालत ने कार्यकारियों के खिलाफ सख्त कदम न उठाए जाने का निर्देश देते हुए संबंधित अदालत से जमानत की मांग करने के लिए आठ सप्ताह का समय प्रदान कर दिया।
बैंक और उसके निदेशक आनंद महिंद्रा, प्रदीप कोट, सी. श्राफ, शिवाजी दाम व कार्यकारी निदेशक असीम घोष, सी जयराम, दीपक ब्रिजमोहनदास गुप्ता और अंशकालीक चेयरमैन शंकर नाथ आचार्य सहित प्रबंध निदेशक एवं कार्यकारी उपाध्यक्ष उदय सुरेश कोटक के खिलाफ मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में एफआईआर दर्ज कराई गई थी।
जस्टिस बीएस चौहान व जस्टिस जेएस खेहर की पीठ ने बैंक के शीर्ष कार्यकारियों की ओर से दायर उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की ओर से एफआईआर दर्ज करने के आदेश को जारी रखा था।
पीठ ने याचिकाओं को अस्वीकार करते हुए कहा कि अदालत इन विशेष अनुमति याचिकाओं पर कोई आदेश नहीं जारी करना चाहती। इसलिए इन्हें खारिज किया जाता है। हालांकि कार्यकारियों के खिलाफ आठ सप्ताह तक कोई कदम न उठाए जाने का निर्देश दिया।
पीठ ने कहा कि इस अवधि में कार्यकारी ट्रायल कोर्ट से जमानत की मांग कर सकते हैं। साथ ही इन्हें यह भी छूट दी जाती है कि सभी वास्तविक और कानूनी मुद्दों पर संबंधित अदालत जा सकते हैं। निचली अदालत मामले की योग्यता के आधार पर हाईकोर्ट की टिप्पणियों से प्रभावित हुए बिना निर्णय लेगी।
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