रेटिंग एजेंसी फिच ने कहा है कि टूजी स्पेक्ट्रम लाइसेंस रद्द किए जाने से कर्ज डूबने की आशंका के मद्देनजर भारतीय बैंकों पर इसका सीमित प्रभाव पड़ेगा। बैंकों के कुल कर्ज का मात्र 0.6 प्रतिशत ही इन दूरसंचार कंपनियों पर है। एजेंसी के मुताबिक बैंकों के वार्षिक लाभ पर इसका असर दिख सकता है। लंदन में जारी रिपोर्ट में फिच ने कहा है कि आधे से अधिक कर्ज राशि बैंकों के पास बैंक गारंटी के रूप में जमा है। भारत में टी दूरसंचार कंपनियों का भविष्य स्पष्ट नहीं है। कुछ कंपनियों को लाइसेंस नहीं मिल सकते हैं। इसका लाभ वे कंपनियां उठा सकती है, जो सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय से बाहर है।
फिच ने कहा है कि जिन कंपनियों के लाइसेंस रद्द किए गए हैं, उन पर कर्ज इस उद्योग के कर्ज का मात्र 0.2 प्रतिशत ही है। यदि यह कर्ज डूब भी जाता है, तो बैंकों की कर्ज गुणवत्ता पर कोई विशेष असर नहीं पड़ेगा। लेकिन उनके वार्षिक लाभ में 10 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है।
कोर्ट ने पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा द्वारा आवंटित टूजी स्पेक्ट्रम के 122 लाइसेस रद्द कर दिए हैं। जिन दूरसंचार कंपनियों के लाइसेंस रद्द किए गए हैं, उन पर सरकारी और निजी क्षेत्र के बैंकों के करीब 20 हजार करोड़ रुपये का कर्ज होने का अनुमान लगाया गया है। इस बीच वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि इन कंपनियों पर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का करीब 10 हजार करोड़ रुपये का कर्ज है। इसमें से 7,500 करोड़ रुपये की राशि बैंक गारंटी के रूप में बैंकों के पास है। एसबीआई का इन कंपनियों पर 4,500 करोड़ रुपये का कर्ज है।
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