भारतीय स्टेट बैंक ने कहा है कि टूजी स्पेक्ट्रम आवंटन रद्द किए जाने के उच्चतम न्यायालय के फैसले से प्रभावित हुई दूरसंचार कंपनियों को पूर्व में दिए गए कर्ज को लेकर वह ज्यादा चिंतित नहीं है।
बैंक के उप प्रबंध निदेशक संतोष नायर ने संवाददाताओं से कहा कि उनके बैंक ने इन दूरसंचार कंपनियों को 11 अरब डॉलर का कर्ज दे रखा है। इसके अतिरिक्त 34 अरब डॉलर की बैंक गारंटी भी दी है। इन कंपनियों के टूजी लाइसेंस रद्द होने के बावजूद बैंक को भरोसा है कि यह कंपननियां वित्तीय रूप से मजबूत हैं और आगे दोबारा टूजी के लिए आवेदन करेंगी। ऐसे में बैंक का कर्ज डूबने की आंशका नहीं है।
एसबीआई के समान ही सार्वजनिक क्षेत्र के एक अन्य बैंक सेंट्रल बैंक ने भी इन कंपनियों को बडे़ कर्ज दे रखे हैं। बैंक की कार्यकारी निदेशक विजय लक्ष्मी अय्यर ने कहा कि यह सभी बड़ी कंपनियां है। इन्होंने अदालत के फैसले के संदर्भ में कुछ न कुछ इंतजाम जरूर करेंगी। हालांकि उन्होंने माना कि अदालत के फैसले से बैंक पर तत्काल कुछ असर पड़ सकता है। ऐसे में इन कंपनियों से बैंक इस सबंध में बातचीत करके कोई बीच का रास्ता निकालेगा।
स्टेट बैंक और सेंट्रल बैंक के अलावा सार्वजनिक क्षेत्र के पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बडौदा, इलाहबाद बैंक, केनरा बैंक और कॉर्पोरेशन बैंक तथा निजी क्षेत्र के यस बैंक ने भी इन कंपनियों को कर्ज दे रखे हैं।
उच्चतम न्यायालय ने पूर्व दूरसंचार मंत्री ए. राजा के कार्यकाल के दौरान 10 जनवरी 2008 के बाद नौ दूरसंचार कंपनियों को जारी सभी 122 टूजी स्पेक्ट्रम लाइसेंस को रद्द करने का आदेश देते हुए कहा कि लाइसेंस आवंटन में सरकार द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया कानून के अनुरूप और पारदर्शी नहीं थी। अदालत ने इन कंपनियों पर 5-5 करोड़ रूपए का जुर्माना भी लगाया है।
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