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केंद्र ने दूरदराज के गांवों में बैंक खोलने का बनाया दबाव

नई दिल्ली/प्रियंवदा सहाय।
Story Update : Tuesday, February 21, 2012    2:19 AM
Central banks in the remote in villages

महंगाई के मोर्चे पर तमाम आलोचनाएं झेल रही सरकार अब अपनी योजनाओं का लाभ सीधे आम आदमी तक पहुंचाने के लिए बैंकों पर दबाव बढ़ा रही है। मनरेगा कामगारों के भुगतान में पारदर्शिता लाने के लिए केंद्र ने बैंकों से वित्तीय समावेशन की योजना 31 मार्च तक हर हाल में पूरा करने को कहा है। इस संबंध में वित्त मंत्रालय ने राज्यों से बातचीत कर बैंकिंग सुविधाएं बहाल करने में अपनी सक्रियता बढ़ाने को भी कहा है। वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक बीते नवंबर तक दो हजार से ज्यादा आबादी वाले 49,437 गांवों में बैंकिंग सुविधाएं बहाल कर दी गई हैं। जबकि मार्च तक करीब 74,404 हजार गांवों को बैंकों से जोड़ा जाना है। बैंक समय से वित्तीय समावेशन योजना को पूरा कर लेते हैं तो अनुमानित तौर पर पांच करोड़ ग्रामीण परिवारों के पास बैंक खाता मौजूद होगा।

बैंकिंग सुविधाएं अभी तक बहाल नहीं हो पाई
मंत्रालय के मुताबिक कुछ राज्यों में वित्तीय समावेशन की योजना तो पटरी पर है लेकिन राजधानी दिल्ली समेत उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल में आवंटित किए गए पचास फीसदी गांवों में बैंकिंग सुविधाएं अभी तक बहाल नहीं हो पाई है। वहीं हरियाणा, जम्मू-कश्मीर और पंजाब में भी सैकड़ों गांवों में बैंकिंग सुविधा बहाल नहीं हो पाई है। मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि वित्तीय समावेशन सुविधा शुरू करने में राज्यों की भूमिका भी काफी महत्वपूर्ण होती है। लेकिन कई राज्य इस मामले में गंभीर नहीं है।

महज 40 फीसदी आबादी के पास बैंक खाता
यही वजह है कि कुछ राज्यों में पचास फीसदी गांवों को वित्तीय समावेशन योजना के तहत कवर नहीं किया जा सका है। हालांकि कुछ हद तक बैंकों की सुस्ती भी इसका कारण है। अभी तक बैंक ऑफ महाराष्ट्र, बैंक ऑफ इंडिया, कॉरपोरेशन बैंक, इंडियन बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंदौर, स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद और स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर ने अपने लक्ष्य को पूरा किया है। जबकि शेष बैंक अभी भी वित्तीय समावेशन योजना को पूरा करने की मशक्कत कर रहे हैं। गौरतलब है कि देश की महज 40 फीसदी आबादी के पास बैंक खाता है।

राज्य---------------------आवंटित गांव----------------बैंक नेटवर्क से दूर गांव
उत्तर प्रदेश----------------16,270------------------------7,034
बिहार----------------------9213-------------------------4336
गुजरात--------------------3502-------------------------1093
पश्चिम बंगाल--------------7486-------------------------3138
(वित्त मंत्रालय, आंकड़े 30 नवंबर 2011 तक)


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vikas, dehradun
manrega ne bharstachaar ko badhawa diya hai.mana ki logo ko rojgaar mila hai magar ab log apne khet khalihaan chod rahe hai jo ki bhawishya mai ek khatarnaak kadam ho sakta hai. aaj bhi hame apne khadyan bhandar badhane ki jaroorat hai.
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