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निसान की छोटी कार इसी साल

कोलकाता।
Story Update : Friday, February 17, 2012    10:31 PM
Nissans small cars this year

माइक्रा के जरिये भारतीय कार बाजार में दस्तक देने वाली निसान इस साल एंट्री लेवल की छोटी कार और एक बहुपयोगी वाहन (एमयूवी) ‘इवालिया’ उतार कर अपनी िस्‍थ्‍ाति और मजबूत करने की तैयारी में है। कंपनी की भारतीय इकाई के प्रमुख किमिनोबु तोकुयामा ने इसका खुलासा करते हुए बताया कि छोटी कार की कीमत चार लाख रुपये से कम होगी। कंपनी ने अपनी एमयूवी की कीमत तो अभी तय नहीं की है, पर इसे अगस्त में उतारने की योजना है।

आधुनिकीकरण पर 1,700 करोड रुपये निवेश
योजना का खुलासा करते हुए तोकुयामा ने बताया कि देश में छोटी कारों की बढ़ती मांग के मद्देजनर कंपनी माइक्रा से कम कीमत वाली छोटी कार उतारने जा रही है। इसके अलावा अगस्त 2012 में सात सीटों वाला बहुद्देश्यीय वाहन ‘इवालिया’ पेश किया जाएगा। विस्तार योजना के तहत कंपनी अगले महीने से चेन्नई स्थित संयंत्र की उत्पादन क्षमता दोगुनी करने जा रही है। उन्होंने बताया कि अब तक चेन्नई संयंत्र में 2,800 करोड़ रुपये का निवेश किया जा चुका है और वर्ष 2015 तक संयंत्र की क्षमता विस्तार और आधुनिकीकरण पर 1,700 करोड रुपये निवेश करने की योजना है।

योजना 1 लाख वाहन भारतीय बाजार में बेचने की
कंपनी 2015 तक भारत में अपना कुल निवेश बढ़ाकर 4,500 करोड़ रुपये तक ले जाना चाहती है। उन्होंने कहा कि छोटी कारों की मांग में 35 से 40 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि हो रही है। इसके मद्देनजर कंपनी ने इस श्रेणी में एक नई कार पेश करने की योजना बनाई है। उन्होंने कहा कि यह योजना अभी प्रांरभिक चरण में है, लेकिन उस कार की कीमत चार लाख रुपये से कम रखने की योजना है। अगले डेढ़ वर्षों में कंपनी की योजना प्रति वर्ष एक लाख वाहन भारतीय बाजार में बेचने की है। वर्तमान में 40 हजार वाहन बेचे जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि अफ्रीका, पश्चिम एशिया और यूरोपीय देशों की बढ़ती मांग की पूर्ति के लिए विस्तार करना जरूरी हो गया है।

लागत बढ़ने से कारों की बिकी में धीमापन आया
इन देशों में अभी 1.60 लाख वाहन निर्यात किए जा रहे हैं। वर्तमान में भारत में कंपनी के मात्र चार ब्रांड माइक्रा, सन्नी, टीएना और एक्सट्रेल की बिक्री की जा रही है। अगस्त में इलाविया के भारतीय बाजार में पेश करने के साथ ही नई छोटी कार उतारने से इसकी संख्या बढ़कर सात हो जाएगी। तोकुयामा ने स्वीकार किया कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ ही कच्चे माल की लागत बढ़ने से कारों की बिकी में धीमापन आया है। इसके चलते पिछले वर्ष कंपनी देश में केवल 13 हजार गाड़ियां ही बेच पाई थी। चालू वित्त वर्ष में 40 हजार वाहन बेचने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अतिरिक्त निसान ने भारी वाहन बनाने वाली प्रमुख कंपनी अशोक लीलैंड के साथ मिलकर नए उत्पाद और इंजन विकसित करने के लिए एक संयुक्त उपक्रम बनाया है। इसके बल पर अशोक लीलैंड 1.25 टन माल ढुलाई के लिए उपयोगी हल्का व्यावसायिक वाहन ‘दोस्त’ पेश करने में सफल रही है।


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