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आवश्यकता से अधिक इस्तेमाल न करें उर्वरक

Bhadohi

Updated Fri, 31 Aug 2012 12:00 PM IST
ज्ञानपुर। किसान नत्रजनधारी उर्वरकों का आवश्यकता से अधिक इस्तेमाल न करें। अधिक नत्रजन के प्रयोग से फसल में कीटों की वृद्धि तेजी से होती है। यह कहना है जिले के उप कृषि निदेशक डॉ. आरएस यादव का। श्री यादव धान की फसल में एकीकृत कीट प्रबंधन तकनीक की जानकारी दे रहे थे।
उन्होंने बताया कि धान की रोपाई समय से करने के साथ-साथ खेत में जल निकासी का समुचित प्रबंध होना आवश्यक है। खेत में पानी भरे रहने से गोभ, गिडार, हिस्पा और फुदका कीट आदि का प्रकोप बढ़ जाता है। यदि दस हरे फुदके या आठ से दस भूरे फुदके प्रति हिल दिखाई पड़े तो थायोमिडान 25 ईसी दवा की 1.25 लीटर या मोनोक्रोटाफास 36 ईसी दवा एक हजार लीटर पानी में घोल कर छिड़काव करें। छिड़काव को तने की ओर केंद्रित करके किया जाना चाहिए। फूल आने के बाद यदि प्रति हिल दो से तीन गंधी कीट का प्रकोप दिखाई दे तो मिथाइल पैराथियान दो फीसदी 20 किग्रा की दर से छिड़काव किया जाना चाहिए। बताया कि खेत को खरपतवारों से मुक्त रखने से कीड़ों को पनपने का अवसर कम मिलता है। बताया धान कि कटाई के बाद खेत की गहरी जोताई करके अवशेषों को नष्ट कर दिया जाना चाहिए।
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