आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

जयपुर

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

राजस्थान +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

नरेश चंद्र ने वतन के लिए दी थी प्राणों की आहूति

Bhadohi

Updated Mon, 13 Aug 2012 12:00 PM IST
खमरिया। देश की आजादी की लड़ाई में शहीद नरेश चंद्र श्रीवास्तव के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। छात्र जीवन से ही भारत माता को परतंत्रता की बेड़ियों से मुक्त कराने के लिए उन्होंने अपने प्राणों की आहूति दे दी। भारत छोड़ो आंदोलन के तहत उन्होंने मिर्जापुर के पहाड़ा स्टेशन को आग के हवाले कर दिया। जिसमें वह अपने साथ ही बचाने के लिए आग में कूद पड़े और बुरी तरह से झुलस गए। काफी प्रयास के बाद भी पुलिस उन्हें जिंदा या मुर्दा नहीं पकड़ सकी।
शहीद नरेश चंद्र श्रीवास्तव का जन्म खमरिया नगर में पिता स्व. रामशंकर लाल श्रीवास्तव और माता स्व. किशन देई श्रीवास्तव के यहां आठ जुलाई 1924 को हुआ था। इनकी प्रारंभिक शिक्षा ननिहाल जौनपुर में हुई थी। इन्होंने बीएलजे इंटर कालेज मिर्जापुर में 10वीं कक्षा की पढ़ाई के दौरान ही देश की आजादी के लिए संघर्ष करना शुरू कर दिया। नौ अगस्त 1942 को पार्लियामेंट में उस समय के मिनिस्टर एमरी के भारत के स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों के विरोध में भाषण देने पर आग बबूला हो गए। 14 अगस्त 1942 को महात्मा गांधी, पं. जवाहर लाल नेहरू के भाषण से प्रभावित होकर मिर्जापुर के गैपुरा में आयोजित क्रांतिकारियों की बैठक में हिस्सा लिया। 17 अगस्त 1942 को बैठक की योजना के अनुसार अपने साथियों जीत नारायण तिवारी निवासी पकरी मिर्जापुर, पुष्करनाथ निवासी बबुरा मिर्जापुर, छविनाथ बिरौरा मिर्जापुर के साथ मिर्जापुर-चुनार रेलवे स्टेशन के बीच पहाड़ा स्टेशन को फूंक दिया। संयोग से एक साथी छविनाथ स्टेशन के अंदर फंस गए और आग की लपटों से घिर गए। शहीद नरेश चंद्र ने अपने जान की परवाह न करके साथी को बचाने के लिए आग से घिरे स्टेशन के भीतर छलांग लगा दी। छविनाथ को तो बाहर फेंक दिया लेकिन शहीद नरेश बुरी तरह से जल गए। पुलिस के आने की जानकारी होने पर वह गंगा के किनारे गए और वहां एक नाव पर बैठकर वाराणसी की ओर जाने लगे। दूसरी नाव से पुलिस ने भी पीछा कर लिया। शहीद नरेश की हालत नाजुक थी और उन्होंने साथियों से कहा कि मुझे छोड़कर तुम लोग अपने को बचाओ। ऐसा कहकर यह सदा के लिए चिरनिद्रा में विलीन हो गए। मातृभूमि की बलि बेदी पर बलिदान देने वाले इस शहीद को कफन भी नसीब नहीं हो सकी। काफी खोजबीन के बाद भी पुलिस साथियों के द्वारा ईख के खेत में छिपाए गए शहीद नरेश के शव को नहीं पा सकी। देश आजाद होने के बाद डा. संपूर्णानंद खमरिया स्थित शहीद नरेश के घर पर सांत्वना देने पहुंचे और फफक कर खुद ही रो पड़े। बीएलजे इंटर कालेज मिर्जापुर के द्वारा शहीद नरेश छात्र निधि बनाकर गरीब छात्रों को आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है।
  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

Browse By Tags

naresh chandra sod

स्पॉटलाइट

रोमांस के मामले में चंचल होती हैं इस राशि की लड़कियां, जानिए दूसरी राशियों के बारे में सब कुछ

  • मंगलवार, 23 मई 2017
  • +

असल जिंदगी में बेहद शर्मीले ये एक्टर टीवी शो में हुए न्यूड, तस्वीरें आईं सामने

  • मंगलवार, 23 मई 2017
  • +

सलमान की पहली फिल्म में काम कर चुकी इस हीरोइन ने की ऐसी गलती, खानी पड़ी थी जेल की हवा

  • मंगलवार, 23 मई 2017
  • +

लगातार माउस के इस्तेमाल से कलाई में होता है दर्द? ये टिप्स देंगे राहत

  • मंगलवार, 23 मई 2017
  • +

अमृता के एलिमनी मांगने पर बोले सैफ, 'मैं कोई शाहरुख खान नहीं जो पैसे देता रहूं'

  • मंगलवार, 23 मई 2017
  • +
Live-TV
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!
Top