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वह देश मुर्दा है, जहां साहित्य नहीं

Bhadohi

Updated Mon, 30 Jul 2012 12:00 PM IST
ज्ञानपुर। जवाहर नवोदय विद्यालय में आयोजित पुस्तक वितरण समारोह में ख्यातिलब्ध साहित्यकार डॉ. राम शिरोमणि ‘होरिल’ कृत उपन्यास ‘गमके माटी गांव की’ और कहानी संग्रह ‘अनबंधी जिंदगी प्रीति की डोर से’ का लोकार्पण आयुक्त विंध्याचल मंडल प्रज्ञान राम मिश्र ने किया।
बतौर मुख्य अतिथि मंडलायुक्त श्री मिश्र ने कहा कि वह देश मुर्दा है, जहां साहित्य नहीं है। डॉ. होरिल भदोही जनपद या पूर्वांचल के ही नहीं, पूरे देश के गौरव हैं। अब तक साहित्य जगत डॉ. होरिल को केवल कवि के रूप में जानता था, लेकिन आज पूरा देश कहानीकार और उपन्यासकार के रूप में उनको मान्यता देगा। कहा कि डॉ. होरिल और ज्ञानपुर की स्मृति मैं नहीं भूल सकता। मेरा सेवा कार्यकाल ज्ञानपुर से ही शुरू हुआ था। डॉ. होरिल में अत्यधिक संवेदना है और यह साहित्य ही नहीं, उनके व्यक्तित्व में भी झलकता है। उन्होंने कहा कि वियोगी होगा पहला कवि आह से उपजा होगा गान, उमड़कर आंखों से चुपचाप नहीं बही होगी कविता अनजान। प्रख्यात शिक्षाविद डॉ. अरुण कुमार सिंह ने कहा कि डॉ. होरिल का व्यक्तित्व भूतभावन भगवान शंकर की तरह है, जिन्होंने विषमता का विष अपने कंठ में ही रोक लिया। विशिष्ट अतिथि डॉ. टीएन सिंह ने कहा कि डॉ. होरिल की रचनाओं की समीक्षा दो-पांच मिनट में नहीं हो सकती। उनकी पुस्तकों की समीक्षा के लिए गहन-मनन और चिंतन की जरूरत है। हिंदी साहित्य परिषद के अध्यक्ष डॉ. राजकुमार पाठक ने कहा कि डॉ. होरिल के कहानी संग्रह अनबंधी जिंदगी प्रीति की डोर से में जो कहानियां हैं, उनमें सिंगारदान कालजयी कहानी है। इसके पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि और अध्यक्ष ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर किया। इसके बाद छात्राओं ने सरस्वती वंदना और स्वागत की प्रस्तुत किया। नवोदय के प्राचार्य केबीएस यादव ने मुख्य अतिथि और अध्यक्ष का माल्यार्पण कर स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. बीडी पांडेय ने किया। इस मौके पर डॉ. विद्याशंकर त्रिपाठी, प्रो. अशोक मिश्र, पारसनाथ मिश्र, डॉ. सविता भारद्वाज, प्रेम जौनपुरी, प्रो. ब्रह्मदेव, डॉ. सुरेश पांडेय ‘मंजुल’ डॉ. विजयकांत दूबे, डॉ. लालजी मिश्र, डॉ. सभापति मिश्र, एसडीएम ज्ञानपुर रत्नाकर मिश्र, सीओ ज्ञानपुर सुखसागर शुक्ल, अर्जुन मुसाफिर, चंदन बागीश, कन्हैयालाल दूबे निशांत, विद्यापति शुक्ल कोकिल, संदीप कुमार, बालाजी, रामचंद्र तिवारी, हीरालाल पाठक, अवधेश राय आदि मौजूद रहे। अंत में अक्षर आरसी के अध्यक्ष कर्मराज किसलय ने आए हुए लोगों के प्रति आभार जताया। कार्यक्रम का समापन वंदेमातरम से हुआ।
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