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कालीन नगरी में झूमकर बरसा सावन

Bhadohi

Updated Fri, 06 Jul 2012 12:00 PM IST
ज्ञानपुर। देर आए दुरुस्त आए। सावन के साथ कालीन नगरी की जमीन पर मानसून ने भी दस्तक दे दी। भगवान भास्कर के शोलों की बारिश से तप रही जिले की जमीन लगभग-लगभग घंटेभर की झमाझम से बृहस्पतिवार को तर हो गई। इसके चलते भीषण गर्मी और उमस से लोगों को राहत मिली और धान की खेती की तैयारियों में जुटे किसानों के चेहरे खिल उठे। खाद-बीज की दुकानों पर अचानक भीड़ बढ़ गई।
लंबे इंतजार के बाद इंद्रदेव कालीन नगरी पर मेहरबान हो गए। सुबह से ही आसमान में उथल-पुथल मचा रहे बादल दोपहर बाद करीब साढ़े तीन बजे झूमकर बरस पड़े। इस दौरान तेज हवाएं भी चलीं। हवा के साथ जुगलबंदी करतीं बारिश की लडि़यां देख किसान चहक उठे। सिवान में हल-बैल चल पड़े खेतों की ओर। धान की खेती की तैयारियां तेज हो गईं। किसानों का कहना है कि अब खेतों में हल चल सकेंगे। बृहस्पतिवार को पौ फटी तो आसमान में बादलों की उमड़-घुमड़ हो रही थी। हवा के हल्के झोंकाें के साथ बादलों द्वारा आसमान की घेरेबंदी का सिलसिला दिनभर चलता रहा। दोपहर बाद करीब तीन बजे तक घेरेबंदी इतनी तेज हो गई कि काली घटाओं के कारण दिन में ही अंधेरा छा गया। थोड़ी ही देर में जिले के ऊपर हवाओं का ऐसा दबाव बना कि बरसात शुरू हो गई। बरसात भी ऐसी कि दूसरे ही दिन सावन झूमकर बरसा। एक घंटे से ज्यादा की बारिश के बाद मौसम का मिजाज अचानक पूरी तरह बदल गया। दोपहर तक गर्मी और उमस से परेशान लोग ठंडी हवाओं के चलते खुशनुमा मौसम का एहसास करने लगे। देर शाम तक आसमान साफ नहीं हो सका था। इससे देर रात फिर बारिश की संभावना से इनकार नहीं किया गया। मौसम के रुख को भांपते हुए किसानों ने पहले से ही तैयारियां तेज कर दीं थीं। इसीलिए नगर की बीज की दुकानों पर किसानों की भीड़ बढ़ गई थी। बारिश के कारण मौसम के तेवर नर्म होने से सावन माह के कांवरिया मेले की तैयारियों को भी पंख लग गए हैं। कांवरियों के उत्साह को चिलचिलाती धूप सुलगा रही थी, लेकिन अब उन्हें भी थोड़ी राहत मिलेगी।
भगवान न करें कि सच हो घाघ की कहावत
अमर उजाला ब्यूरो
ज्ञानपुर। काफी इंतजार के बाद आज हुई बारिश ने लोगों को भले ही राहत दे दी हो, लेकिन घाघ की कहावतों के अनुसार देर से हुई बारिश का लाभ चार नक्षत्रों तक नहीं मिलता। शुरुआत में बारिश होती तो उसका असर चार नक्षत्रों में मिलता है।
घाघ की कहावत के अनुसार हस्त चारि अद्रा, पुनर्वस, तुख्य सरेखा-मघ पंचक मघा, पूर्वा, उत्तरा, हस्त, स्वाती। यानी अद्रा यानी आषाढ़ नक्षत्र के शुरू में हुई बारिश का असर पुनर्वसु, तुख्य एवं सरेखा तक रहता है, लेकिन अद्रा नक्षत्र के बाद पखवारा बीतने पर गुरुवार को बारिश हुई है। इसलिए घाघ की कहावत के अनुसार चार नक्षत्र तक बारिश पर्याप्त मात्रा में नहीं होने की संभावना है। इसलिए अच्छी बारिश के लिए अब घाघ की कहावत की दूसरी पंक्ति का इंतजार करना होगा। क्योंकि मघा नक्षत्र की शुरुआत में अच्छी बारिश हो गई तो पूर्वा, उत्तरा, हस्त और स्वाती नक्षत्र में बारिश अच्छी होगी। इसमें हस्त नक्षत्र को हथिया नक्षत्र भी कहते हैं।
इसके अलावा घाघ की कहावत, आवत नहीं आदर गई जात न दीन्हौं हस्त, ये दोनों पछताएंगे पाहुन और गृहस्थ। यानी आषाढ़ आते ही न बरसे और हथिया नक्षत्र खत्म होते न बरसे तो पैदावार अच्छी नहीं होती है। इससे गृहस्थ से लेकर घर पर आने वाले मेहमान भी पछताएंगे।
ग्रामीण कृषक और घाघ कहावत के जानकार एके चतुर्वेदी का कहना है कि घाघ के अनुसार आषाढ़ नक्षत्र से भी बारिश की कोई विशेष संभावना नहीं दिख रही है, लेकिन प्रकृति पर निर्भर है कि वह किस तरह का रुख दिखाती है। घाघ कहावत के अनुसार अब मघा नक्षत्र के शुरुआत की बारिश पर ही आगामी नक्षत्रों में भरपूर बारिश की संभावना रहेगी।
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