आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

जयपुर

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

राजस्थान +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

शिक्षा बेपटरी, प्रशिक्षण पर खर्च हो रहे 14 करोड़

Bhadohi

Updated Mon, 14 May 2012 12:00 PM IST
ज्ञानपुर। परिषदीय विद्यालयों में बच्चों को आधारभूत शिक्षा देने के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार पानी की तरह पैसा बहा रही है। एक-एक विद्यालय पर लाखों रुपये खर्च हो रहा है लेकिन शिक्षा व्यवस्था पटरी पर लौटती नजर नहीं आ रही है। पानी की तरह पैसा बहाने की एक बानगी शिक्षकों के प्रशिक्षण से जुड़ी है। प्रशिक्षण के नाम पर जिले में महीने में 14.5 करोड़ रुपये खर्च हो रहा है।
शिक्षकों के प्रशिक्षण पर गौर करें तो एनपीआरसी के प्रत्येक शिक्षकों को सप्ताह में एक दिन प्रशिक्षण दिया जाता है। एक शिक्षक के प्रशिक्षण पर 75 रुपये मिलता है। एक एनपीआरसी में कम से 40 शिक्षक हैं। महीने में एक एनपीआरसी पर 160 प्रशिक्षण होते हैं, जिसमें 12 हजार रुपये खर्च होते हैं। इसमें शिक्षक के नाश्ते, भोजन शामिल है। जिले में 79 एनपीआसी हैं जिनमें प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों के 52 सौ शिक्षक हैं। 52 सौ शिक्षकों पर एनपीआरसी स्तर पर ही 6.24 करोड़ खर्च होता है। प्रशिक्षण यहीं नहीं थम जाता है, इसी तरह एबीआरसी, बीआरसी और डायट पर भी प्रशिक्षण चलता है। शिक्षकों के प्रशिक्षण के नाम पर ही एक ही जिले में 25 करोड़ रुपये के आसपास खर्च होता है। इतनी बड़ी धनराशि खर्च करने के बाद भी शिक्षण व्यवस्था बेपटरी होती जा रही है। विद्यालयों में गुरुजन बालकों को किस तरह पढ़ाते हैं इसका खुलासा आए दिन हो रहे निरीक्षणों में खुल जाता है। विद्यालयों में छात्रों का पंजीकरण ज्यादा है लेकिन मौके पर 25 प्रतिशत भी छात्र नहीं मिलते। जबकि छात्रों को अच्छी शिक्षा मिले इसके लिए उन्हें मुफ्त ड्रेस, मुफ्त शिक्षा, मुफ्त में भोजन, वजीफा अलग से बस्ते, पुस्तक सभी मुफ्त में मिल रहा है। अधिकांश विद्यालयों में सरकार ने शिक्षक छात्र अनुपात भी एक शिक्षक पर 30 छात्र कर दिया है। परिषदीय शिक्षा पर वर्तमान शिक्षा अधिकारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। पर बेसिक शिक्षा में जेडी पद से सेवानिवृत्त हुए रमेश सिन्हा का कहना है कि पूर्व के जितने अधिकारी हैं वे प्राथमिक विद्यालयों से ही निकलते हैं। तब विद्यालयों में शिक्षा के अलावा कोई संसाधन नहीं था। आज सब कुछ है इसके बाद भी कोई छात्र आगे नहीं बढ़ता। निजी विद्यालय हों या सरकारी या फिर ट्रस्ट के, सभी में एक समान शिक्षा दी जानी चाहिए। एक समान नियम बने और एक समान शिक्षा दी जाए तभी परिषदीय शिक्षा पटरी पर लौट सकेगी।
  • कैसा लगा
Comments

स्पॉटलाइट

नवरात्रि 2017 पूजा: पहले दिन इस फैशन के साथ करें पूजा

  • बुधवार, 20 सितंबर 2017
  • +

इन 4 तरीकों से चुटकियों में बढ़ेंगे आपके बाल...

  • बुधवार, 20 सितंबर 2017
  • +

'श्री कृष्‍ण' बनाने वाले रामानांद सागर की पड़पोती सोशल मीडिया पर हुईं टॉपलेस, देखें तस्वीरें

  • बुधवार, 20 सितंबर 2017
  • +

महिला ने रेलवे स्टेशन से कर ली शादी, जानिए ये दिलचस्प लव स्टोरी

  • बुधवार, 20 सितंबर 2017
  • +

महेश भट्ट की खोज थी 'आशिकी' की अनु, आज इनको देख आ जाएगा रोना

  • बुधवार, 20 सितंबर 2017
  • +
Top
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!