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सत्संग और सत्य का साथ सर्वश्रेष्ठ: भोले बाबा

Badaun

Updated Thu, 20 Dec 2012 05:31 AM IST
उझानी। सत्संग और सत्य का साथ मानव के लिए सर्वश्रेष्ठ है। यह समझाते हुए भोले बाबा ने अपने अनुयाइयों को मानव जीवन के अनुरूप काम करने की सलाह दी। वह यहां संजरपुर रोड के समीप सत्संग में जुटे अनुयाइयों से मुखातिब थे। गंजडुडबारा से पीलीभीत जाते रास्ते में साकार विश्व हरि के प्रवचन की सूचना पाकर सत्संग में बुधवार को भोले बाबा के अनुयाइयों का सैलाब उमड़ पड़ा।
भोले बाबा ने करीब दो घंटा तक चले साकार विश्व हरि के सत्संग में महज 15 मिनट अपने अनुयाइयों को मानव जीवन के उत्थान से जुड़ा प्रवचन किया। उन्होंने कहा, दुनिया में मानव धर्म सबसे अच्छा धर्म है। इंसान को इंसान से प्रेम करना चाहिए। जीवन का लक्ष्य ही मानवता होना चाहिए। लक्ष्य तय करना भी मानव के जीवन का एक हिस्सा है। लक्ष्य पाने के बाद मनुष्य असली लक्ष्य पर गौर नहीं करता। मनुष्य का असली लक्ष्य मानव सेवा होना चाहिए।
उन्होंने सत्संग का भी महत्व बताया। बोले, सत्संग का मतलब ही सत्य का साथ है, यही कर्म सर्वश्रेष्ठ है। सत्य के साथ से ही मानव जीवन का कल्याण संभव है। इससे पहले भोले बाबा की महिला अनुयाइयों ने जीवन के कल्याण से सराबोर भजन सुनाकर भक्तों को भाव विभोर कर दिया। साथ ही सेवादारों ने सत्संग में जलसेवा भी की। इस दौरान अनुयाइयों में गजब का उत्साह नजर आया। सेवादारों में शीतल प्रसाद, मुन्नालाल, राजवीर सिंह संजीव, अखिलेश, रामप्रसाद सौरभ, महावीर और उमाशंकर आदि का सहयोग रहा।
साकार विश्व हरि के सत्संग में उमड़ी अनुयाइयों की भीड़
गंजडुडबारा से पीलीभीत जाते वक्त उझानी में प्रवचन
फोटो-17, 18
उझानी। सत्संग और सत्य का साथ मानव के लिए सर्वश्रेष्ठ है। यह समझाते हुए भोले बाबा ने अपने अनुयाइयों को मानव जीवन के अनुरूप काम करने की सलाह दी। वह यहां संजरपुर रोड के समीप सत्संग में जुटे अनुयाइयों से मुखातिब थे। गंजडुडबारा से पीलीभीत जाते रास्ते में साकार विश्व हरि के प्रवचन की सूचना पाकर सत्संग में बुधवार को भोले बाबा के अनुयाइयों का सैलाब उमड़ पड़ा।
भोले बाबा ने करीब दो घंटा तक चले साकार विश्व हरि के सत्संग में महज 15 मिनट अपने अनुयाइयों को मानव जीवन के उत्थान से जुड़ा प्रवचन किया। उन्होंने कहा, दुनिया में मानव धर्म सबसे अच्छा धर्म है। इंसान को इंसान से प्रेम करना चाहिए। जीवन का लक्ष्य ही मानवता होना चाहिए। लक्ष्य तय करना भी मानव के जीवन का एक हिस्सा है। लक्ष्य पाने के बाद मनुष्य असली लक्ष्य पर गौर नहीं करता। मनुष्य का असली लक्ष्य मानव सेवा होना चाहिए।
उन्होंने सत्संग का भी महत्व बताया। बोले, सत्संग का मतलब ही सत्य का साथ है, यही कर्म सर्वश्रेष्ठ है। सत्य के साथ से ही मानव जीवन का कल्याण संभव है। इससे पहले भोले बाबा की महिला अनुयाइयों ने जीवन के कल्याण से सराबोर भजन सुनाकर भक्तों को भाव विभोर कर दिया। साथ ही सेवादारों ने सत्संग में जलसेवा भी की। इस दौरान अनुयाइयों में गजब का उत्साह नजर आया। सेवादारों में शीतल प्रसाद, मुन्नालाल, राजवीर सिंह संजीव, अखिलेश, रामप्रसाद सौरभ, महावीर और उमाशंकर आदि का सहयोग रहा।
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