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मंडी का दर्जा खत्म, सहसवान बनी उपमंडी

Badaun

Updated Fri, 07 Dec 2012 05:30 AM IST
सहसवान। शासन ने 40 साल पुरानी मंडी समिति को मानक के अनुसार आय न होने पर मंडी समिति के दर्जे को समाप्त कर उपमंडी स्थल बना दिया। मंडी समिति के समाप्त होने से किसानों को उनकी उपज का अब सही मूल्य मिलना दूर की कौड़ी साबित होगा। शासन ने मानक के अनुसार 66 लाख से कम आय होने के कारण मंडी समिति के दर्जे को समाप्त कर उपमंडी समिति स्थल बना दिया गया। मंडी समिति के समाप्त हो जाने से किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य मिलना मुश्किल होगा। किसान अपनी उपज को आसानी से विक्रय कर उचित मूल्य प्राप्त कर लेते थे मगर अब यह किसानों के लिए बुरी खबर है कि सहसवान की मंडी समिति को समाप्त कर दिया गया है। सहसवान मंडी समिति से प्राप्त विवरण के अनुसार वर्ष 2008-2009 में आय साढे़ 48 लाख और खर्चा साढ़े 52 लाख, वर्ष 2009-2010 में आय साढे 56 लाख और खर्चा 46 लाख, वर्ष 2010-2011 में आय साढे 50 लाख और खर्चा 66 लाख तथा वर्ष 2011-2012 में आय 34 लाख और खर्चा साढे 28 लाख हुआ। चार साल के दौरान सहसवान की मंडी समिति शासन के मानक के अनुसार आय 66 लाख का आंकडा पार नहीं कर सकी। शासन ने 66 लाख से कम आय वाली मंडी समितियों को समाप्त कर उपमंडी स्थल बना दिया।
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नगर के मोहल्ला दहलीज निवासी कृषक मुहब्बे अली ने बताया कि शासन ने सहसवान की मंडी समिति को समाप्त कर किसानों के साथ अन्याय किया है। अब किसान को अपनी उपज का सही मूल्य पाने के लिए इधर-उधर भटकना पडे़गा। जब अधिकारी ही मंडी में नहीं बैठेंगे तब किसान अपनी समस्याएं किसको बताएगा।

नगर के मोहल्ला जहंगीराबाद निवासी मोहर सिंह का कहना है कि मंडी समिति के समाप्त होने से किसानों के सामने भारी मुसीबत खड़ी हो गई है। वह अनाज को सस्ते दामों पर बेचने के लिए खुले बाजार में मजबूर होगा।

नगर के मोहल्ला शहबाजपुर निवासी रामवीर का कहना है कि सरकार ने मंडी समिति को खत्म कर किसानों के साथ बहुत बुरा किया है। अब किसान अपने अनाज को सस्ते दामों में व्यापारियाें के सामने खुले बाजार में बेचने को मजबूर होगा। खाद और बीज के दाम आसमान छू रहें है और फसल में लागत भी काफी बढ गई है


कृषक श्यामलाल का कहना है कि जब मंडी समिति थी तब किसानों का अनाज सही रेट पर बिक जाता था उन्हें व्यापारियों को सस्ते दामों पर नहीं बेचना पडता था। मंडी समिति खत्म हो जाने से किसान अपने अनाज को खुले बाजार में कम दामों पर बेचेगा और व्यापारी उसके माल को अपनी मनमर्जी के हिसाब से खरीदेगा।
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