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ककोड़ा घाट पर गूंजा ‘जय गंगा मैया’

Badaun

Updated Wed, 21 Nov 2012 12:00 PM IST
मेला ककोड़ा। झंडी पूजन के साथ मेला शुरू होते ही यहां तैयारियां भी जोर पकड़ गई हैं। हालांकि अभी मेले में इक्का-दुक्का लोग ही पहुंचे हैं लेकिन मेला शुभारंभ मौके पर ककोड़ा-घाट जय गंगा मैया के उद्घोष से गूंज उठा। मेला परिसर में कोतवाली बन गई है हालांकि इसमें स्टाफ नहीं पहुंचा है। ठेकेदारों ने भी रही-सही व्यवस्थाओं को दुरुस्त करना शुरू कर दिया है।
पूजन के बाद डीएम ने मेले की तैयारियों की समीक्षा कर जिला पंचायत और अन्य विभागों के अधिकारियों को मेले की व्यवस्थाएं दुरुस्त रखने के निर्देश दिए। इसके अलावा डीएम ने मेले में सफाई व्यवस्था पर खास ध्यान दिए जाने के निर्देश दिए।
मंगलवार को ठेकेदार अपने मजदूरों के साथ मेले की तैयारियों में दिनभर जुटे रहे। टैंट ठेकेदार मेले में राउटी बनवाने में जुटे दिखाई दिए तो जंगल सफाई के काम में भी मजदूर जुटे रहे। मेले में रोशनी की व्यवस्था का काम भी चल रहा है। इसके साथ ही घाट कटाई का काम जीसीबी की सहायता से जारी रहा। मेला परिसर में जगह- जगह ठेकेदार ने दर्जनों हैंडपंप लगाकर तैयार कर दिए हैं। सिरकी पाल ठेकेदार के मजदूर भी दिनभर काम में जुटे रहे।

इंसेट-
मुगल काल में बना था मेला का नक्शा
कादरचौक के ककोड़ा गंगा घाट पर लगने वाले मेले का इतिहास काफी पुराना है। मेले की व्यवस्था के लिए मुगल काल में नक्शा बनाया गया था। उसके बाद अंग्रेजों के शासन काल में भी इसी नक्शे के अनुसार मेले की व्यवस्थाएं चलती रहीं और आजाद भारत में भी उसी नक्शे को आधार बनाकर मेला सजाया जाता है। जिला पंचायत के प्रशासनिक अधिकारी महावीर सिंह ने यह जानकारी दी।

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बन गई मेला कोतवाली
मेला परिसर में सिरकी पाल ठेकेदार ने मेला कोतवाली भी तैयार कर दी है। लेकिन मेला कोतवाली में पुलिस अभी नहीं पहुंची है। मेले में काम करने वाले मजदूर पुलिस न होने के कारण शाम होते ही तंबुओं में दुबक जाते हैं। इससे मेले की व्यवस्थाएं पूरी होने में ज्यादा समय लग रहा है।
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वीआईपी रोड का बुरा हाल
मेले की व्यवस्थाओं के लिए जिला पंचायत ने लाखाें रुपये के टेंडर तो कर दिए, लेकिन काम को कैसे अंजाम दिया जा रहा है इस पर गौर नहीं किया। मेले में बीड़ा रोड का काम भी सही ढंग से नहीं किया गया। जमीन पर पुआल डालकर उसे रेत से ढक दिया गया है। वीआईपी कैंपस को जाने वाली बीड़ा रोड का आलम यह है कि उस पर चलना भी मुश्किल है।

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मेला ककोड़ा में चाट पकोड़ी, चाय आदि की दुकानों का सामान लेकर लोग मेले में पहुंचकर तैयारियां शुरू कर दी हैं। कई दुकानदारों ने मय परिवारों के मेला में डेला डाल दिया गया। ये परिवार 15 दिन तक यही रहकर अपनी रोजी रोटी का जुगाड़ करेंगे।

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सूना रहेगा ककोड़ा देवी मंदिर
मेला ककोड़ा में हर साल लाखों श्रृद्धालु गंगा स्नान के लिए आते हैं। मेले के पहले दिन जिला पंचायत के अधिकारियों ने ककोड़ा गांव जाकर ककोड़ा देवी की पूजा अर्चना की। लेकिन इसके बाद पूरी मेला अवधि में न तो जिला पंचायत के किसी अधिकारी को इस मंदिर की याद आएगी और न ही श्रृद्धालुओं को। अनदेखी का आलम यह है कि जिस देवी ककोड़ा के नाम पर मिनी कुंभ जुटता है उसी मंदिर पर पूरी मेला अवधि में कोई रौनक नहीं होती है।
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