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बेसिक स्कूलों की निगहबानी करेंगी जांच समिति

Badaun

Updated Wed, 21 Nov 2012 12:00 PM IST
बीएसए ने डीएम को भेजी फाइल
सर्व शिक्षा अभियान की ड्रेस वितरण की होगी समीक्षा
ड्रेस की कमीशनखोरी में शिक्षक, ठेकेदारों के फूले हाथ-पांव
विभागीय अधिकारियों को सता रहा जांच समिति का डर
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शलभ सक्सेना
पीलीभीत। बेसिक स्कूलों में गरीब बच्चे भी ड्रेस पहने। इसके लिए भले ही शासन ने करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा दिए हों, लेकिन योजना के क्रियान्वयन की हकीकत जांच समिति द्वारा परखी जाएगी। इसके लिए बीएसए ने फाइल बनाकर डीएम ऑफिस में भेज दी है। ड्रेस वितरण की समीक्षा इसी के आधार पर की जाएगी।
बेसिक स्कूलों में गरीब बच्चों को स्कूली ड्रेस मुहैया करने के लिए सरकार ने करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाया, लेकिन उस धन का लाभ देहात क्षेत्र के बच्चों को नसीब नहीं हुआ। अधिकारियों के निरीक्षण में कई बार इसकी पोल खुल चुकी है। लाभ कार्यालय तक सीमित रह गया। कमीशन पाने को कई स्कूलों में यूनिफार्म आननफानन में बाजार से औने-पौने दामों पर ड्रेस खरीद कर बच्चों को वितरित कर दी। ड्रेस वितरण के लिए पांच नवंबर तक शासन का आदेश था। ड्रेस बंटने की जांच के लिए जिलाधिकारी द्वारा समिति का गठन किया जाना था, लेकिन देर ही सही विभाग द्वारा डीएम कार्यालय में भेज दी गई है। देहात क्षेत्र में कई स्कूलों में बच्चों को एक ही ड्रेस मिलने की शिकायत महकमे के पास पहुंची है।
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ड्रेस बंटने का विवरण राज्य सरकार को उपलब्ध कराया जाना था। इसके लिए बीस नवंबर को सख्त निर्देश दिए थे। जांच आख्या आशुतोष दुबे वरिष्ठ विशेषज्ञ राज्य परियोजना कार्यालय एसएसए को उपलब्ध कराने को कहा, लेकिन इस आदेश को किसी भी शिक्षाधिकारी या उच्च अधिकारी ने गंभीरता से नहीं लिया।
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क्या करना था समिति को
- विद्यालय प्रबंध समिति द्वारा यूनिफार्म के कपड़े के क्रय मूल्य की रसीद की प्रधानाध्यापक द्वारा सत्यापित रसीद
- जिस दर्जी ने कपड़े सिले हैं उसको दिए गए भुगतान की मूल रसीद प्रधानाध्यापक द्वारा सत्यापित
- यूनिफार्र्म के कपड़े एवं दर्जी को दिए गए भुगतान के सापेक्ष एकाउंट पे चेक का विवरण
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किन अधिकारियों को बननी थी समिति
नायब तहसीलदार, खंड शिक्षाधिकारी सहायक खंड शिक्षाधिकारी
- कार्यरत लेखा संवर्ग के अधिकारी एवं कर्मचारी जो न्यूनतम लेखाकार स्तर के हो।
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क्या था आदेश
-यूनिफार्म की सिलाई एवं वितरण के अभिलेख सुरक्षित रखे जाएं
- विद्यालय प्रबंध समिति द्वारा क्रय समिति के गठन की पुष्टि की जाए
- ड्रेस की नाप टेलर द्वारा होनी चाहिए
- ड्रेस विलंब से प्राप्त हुई है तो जुर्माना लगाया जाएं
- ड्रेस के वितरण अभिभावक के हस्ताक्षर के बाद ही किया जाएं
- ड्रेस के पैसे को एकाउंट चेक द्वारा भुगतान करें
- जिन स्कूलों में 250 से अधिक छात्र हैं वहां टेंडर की कार्यवाही जबकि बीस हजार रुपये से एक लाख रुपये का बजट में कोटेशन की कार्यवाही हो।
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फाइल बनाकर डीएम कार्यालय भेज दी गई है। खंड अधिकारी भी निरीक्षण कर रहे है। ड्रेस वितरण में किसी तरह की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। - मनोज कुमार बीएसए
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