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पुरानी गाड़ी से नए दौर की नहीं हो सकती सैर

Badaun

Updated Fri, 19 Oct 2012 12:00 PM IST
शिक्षण संस्थाओं को आगे बढ़ाना है दया अग्रवाल का शगल
रिटायरमेंट से पहले अपने कालेज को दिलाई विज्ञान की मान्यता
जिले के कई स्कूलों को आधुनिक सुविधाएं करा चुकी हैं मुहैया
सिटी रिपोर्टर
शाहजहांपुर। शिक्षण संस्थाओं को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस कराना दया अग्रवाल का शगल बन चुका है। उनका मानना है कि आधुनिक युग की सैर पुरानी गाड़ी पर बैठकर नहीं की जा सकती। लिहाजा, गाड़ी को उसी अनुरूप रखना चाहिए, जिस पर बैठकर सवार आगे बढ़े और देश दुनिया में अपनी उपस्थिति दर्ज करा सके।
दया अग्रवाल आर्य महिला इंटर कालेज में प्रधानाचार्य रह चुकी हैं। श्रीमती अग्रवाल ने सन 2002 में सेवा निवृत्त होने से ठीक पहले कालेज को विज्ञान वर्ग की मान्यता दिलाकर एक बड़ा काम किया था। बकौल श्रीमती अग्रवाल अमेरिका में बसे उनके इंजीनियर बेटे राजीव अग्रवाल ने कह दिया था कि मान्यता को एक भी पैसा रिश्वत के रूप में खर्च नहीं करना है। बेटे के हठ को सिर आंखों पर लेने वाली मां ने ऐसा ही किया। नतीजा यह रहा कि मान्यता की राह में कांटे बिछते चले गए।
इसी बीच बेटे राजीव ने तत्कालीन प्रधानमंत्री से बात कर मान्यता का रास्ता साफ कराया। इतने से ही श्रीमती अग्रवाल के मन को शांति नहीं मिली तो उन्होंने रिटायर होने के बाद जनपद की शिक्षण संस्थाओं को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। वरिष्ठ अधिवक्ता राजेंद्र शरण अग्रवाल की धर्मपत्नी दया अग्रवाल ने शिक्षण संस्थाओं को आधुनिक सुविधाएं मुहैया कराने को कदम बढ़ाने शुरू कर दिए।
शहर में डॉ. सुदामा प्रसाद कन्या इंटर कालेज, इस्लामियां इंटर कालेज, जीजीआईसी, आर्य महिला इंटर कालेज, आर्य कन्या इंटर कालेज, आर्य महिला महाविद्यालय, तिलहर एलबीजेपी इंटर कालेज, रुद्रपुर तिलहर में बालिका कालेज को विज्ञान उपकरण, आधुनिक ब्लैक बोर्ड, फर्नीचर, भवन निर्माण आदि से सुसज्जित करा दिया। यानी स्कूलों को डिमांड के अनुरूप उन्होंने बेटे की मदद से सहायता प्रदान की।
दया अग्रवाल की चार संतानें हैं। उन पर भगवान की इतनी कृपा बरसी कि आज चारों संतानें विदेश में देश का नाम रोशन कर रही हैं। बड़ा बेटा राजीव अग्रवाल और बेटी मुदिता यूएसए में तथा पंकज अग्रवाल कनाडा में इंजीनियर है। जबकि संजीव अग्रवाल पत्नी छवि अग्रवाल के साथ यूएसए में ही डॉक्टर हैं।
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