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कागजों में तंदरुस्त हो रहे हैं बच्चे

Badaun

Updated Fri, 12 Oct 2012 12:00 PM IST
बदायूं। तीन से छह साल तक के बच्चों को तंदरुस्त करने को चलाई गई पुष्टाहार योजना कागजों तक ही सीमित है। हकीकत में इसका लाभ बच्चों को नहीं मिल पा रहा है। सर्वे के मुताबिक 1.18 लाख बच्चे आंगनबाड़ी केंद्रों से नहीं जुड़ पाए। वर्कर्स के अभाव में 179 केंद्रों के तो ताले ही नहीं खुलते। यहां बच्चे हर दिन आकर लौट जाते हैं। महकमे के अफसर निरीक्षण के नाम पर कागजी कोरम पूरा कर लेते हैं।
सबसे पहले 1985 में बिनावर और बिसौली में आंगनबाड़ी केंद्र खुले थे, उसके बाद जिले भर में आंगनबाड़ियां स्थापित कराई गईं। अब इनकी संख्या 3432 है। इनमें 2926 आंगनबाड़ी वर्कर्स कार्यरत हैं। जबकि पद 3103 हैं। पिछले सर्वे के मुताबिक पुष्टाहार और हॉट कुक के लिए 2, 35, 975 बच्चों का चयन हुआ था, लेकिन केंद्रों पर 1,17,104 बच्चे ही पंजीकृत हैं। 1,18,871 बच्चे आज भी इन केंद्रों तक नहीं पहुंच पाए। जबकि शासन हर साल करोड़ों रुपये उनके लिए खर्च कर रहा है। सहायिकाओं की नियुक्तियां इन बच्चों को घरों से लाने के लिए की गई है, लेकिन वह भी जिम्मेदारी से बच रही हैं।
वार्ड नंबर दस में संचालित केंद्र दिन में 11 बजे ही बंद मिला। जबकि आठ से दोपहर 12 बजे तक खोलने का समय है। यहां 75 बच्चे पंजीकृत बताए गए। हर दिन 35 से 40 आते हैं। आंगनबाड़ी वर्कर संगीता रानी ने बताया कि पुष्टाहार लेने जाना है, इसलिए केंद्र जल्दी बंद कर दिया। बीएलओ के कार्य के अलावा जनगणना का भी काम करना पड़ रहा है।
पटियाली सराय में केंद्र कोठरी की तरह है। बमुश्किल दस से 12 बच्चों के बैठने को जगह है। यहां पंजीकृत बच्चों की संख्या 50 है, लेकिन दो ही मिले। रजिस्टर के मुताबिक कितने बच्चों को पुष्टाहार दिया गया तो बताया गया कि अभी मेंटेन नहीं किया। इसी वार्ड में बना दूसरा केंद्र भी कोठरी की तरह है। यहां 80 बच्चे पंजीकृत दिखाए गए, जबकि 15 ही मिले। सूत्र बताते हैं कि बच्चे गिने-चुने आते हैं, लेकिन पुष्टाहार पूरा खर्च दिखाया जा रहा है।

वर्कर्स बोलीं घरवाले नहीं भेजते बच्चों को
वार्ड नंबर दस की वर्कर शोभा रानी कहती हैं कि बच्चे आकर चले जाते हैं। सभी को पुष्टाहार दिया जा रहा है। कई बच्चों को घरवाले नहीं भेजते हैं। कुछ स्कूल चले जातेे हैं।
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किराए की रकम नहीं मिलती
पटियाली सराय केंद्र की वर्कर बीना का कहना है कि पुष्टाहार दिया जा रहा है। हॉटकुक दो माह से बच्चों को मिल रहा है। किराए पर केंद्र चला रहे हैं। इसकी रकम नहीं मिलती।

आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण किया जाता है जो केंद्र बंद मिलते हैं तो वहां तैनात वर्कर्स का मानदेय काटा जाता है। -डा. आरती सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी
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